अपहरण के बाद कक्षा बारह की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को न्यायालय ने सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जमानत पर बाहर दोषी को फैसला आने के बाद जेल भेज दिया गया।
जानकारी के मुताबिक मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के एक गांव में निजी इंटर कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा (15) की कॉलेज की छुट्टी करीब दो बजे होती थी। इसके बाद छात्रा शाम 6:30 बजे तक तीन ट्यूशन पढ़ती थी। 15 सितंबर 2012 की सुबह आठ बजे छात्रा कॉलेज में पढ़ने जाने के लिए घर से निकली थी लेकिन वह शाम तक घर वापस नहीं पहुंची। परिजनों ने तलाश किया तो पता चला की घटना वाले दिन छात्रा न तो स्कूल पहुंची और न ही ट्यूशन गई थी। तलाश करने के दौरान लोगों ने बताया कि छात्रा को गांव का ही युवक बहला-फुसलाकर ले गया। इससे पहले भी आरोपी युवक छात्रा के साथ कई बार छेड़खानी कर चुका था। आरोपी छात्रा को अपहरण कर अपने भाई के पास छोड़ आया था। जहां उसने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। छात्रा के पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी और उसके छोटे भाई के खिलाफ अपहरण कर दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज की थी। इस घटना का मुख्य आरोपी नाबालिग था, इसलिए उसका मुकदमा बालक न्यायालय में स्थानांतरित हो गया था। जबकि बालिग आरोपी का मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष (एससी एसटी एक्ट) तृप्ता चौधरी की अदालत में विचाराधीन था।
सोमवार को न्यायालय ने मामले में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता मनोज सक्सेना ने पैरवी की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया और सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता मनोज सक्सेना के मुताबिक मुख्य दोषी नाबालिग को भी बाल न्यायालय से पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है।