तापमान में चल रहे उतार-चढ़ाव के दौर से सेहत का मिजाज बिगड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह से तापमान सामान्य से तीन से चार डिग्री सेल्सियस कम है। इसकी वजह से स्थिति यह है कि जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में बुखार और नेत्र रोगियों की संख्या में प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। जिला अस्पताल में दोपहर डेढ़ बजे तक भी पर्चा बनाने के अलावा औषधि वितरण विंडो पर मरीजों की लाइनें लगी रहती हैं। सीएमओ के अनुसार गुरुवार को इंटर डिपार्टमेंटल मीटिंग में छह से 16 तक अभियान चलाने की रणनीति बनी है। घर-घर सर्वे पांच बिंदुओं पर किया जाएगा।
मरीजों की संख्या में सबसे ज्यादा इजाफा
चिकित्सकों के अनुसार इस समय लोगों को सेहत के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। खानपान के साथ नियमित दिनचर्या में बदलाव करना होगा। जिला अस्पताल में प्रतिदिन साढ़े 12 सौ नए पर्चे बनवाए जा रहे हैं। जिला अस्पताल की डिस्पेंसरी के कर्मचारियों का कहना है कि सबसे अधिक मरीज बुखार के आ रहे हैं। प्रतिदिन दो हजार मरीजों को बुखार की दवा दी जा रही है। पिछले एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनके मिश्रा का कहना है कि बुखार के अलावा मरीजों में सबसे अधिक परेशानी गला खराब होने की आ रही है। इसमें गले में दर्द, खराश, जुकाम, खांसी हो रही है।
शिशुओं को हो रही आंखों की समस्या
वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. अब्दुल कादरी अंसारी ने बताया कि सामान्य दिनों में नेत्र रोगी 30 से 35 तक रहते थे, लेकिन अब वह प्रतिदिन डेढ़ सौ तक पहुंच गई है। इसमें आंखों में लालिमा, सूजन और एलर्जी की प्रमुख समस्या आ रही है। यह नवजात शिशुओं में भी है। करीब 25 से 30 मरीज शिशु आते हैं। अभिभावकों को बच्चों की आंखों को गुनगुने पानी में कॉटन भिगोकर उससे साफ करना चाहिए।
यह बरतें सावधानी
- तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर है, इसलिए एसी और कूूलर की हवा से बचें।
- फ्रिज के ठंडे पानी से दूरी बना लें और गुनगुने पानी से कुल्ला करें।
- फ्रिज में रखे या बाजार के भोजन को खाने के बजाय ताजा भोजन करें।
- गले में खराश होने पर काढ़ा भी पी सकते हैं।
- किसी दूसरे का तौलिया इस्तेमाल न करें। इससे स्निक एलर्जी के अलावा आंखों की परेशानी हो सकती है।
- पूरी आस्तीन के सूती कपड़े जरूर पहनें। रात को सोते समय चादर भी ओढ़ सकते हैं।
बुखार की सतर्कता मद्देनरज सात से 16 सितंबर तक घर-घर पांच बिंदु बुखार, कोविड का संभावित, टीबी का रोगी, 45 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे लोग जिनको कोविड का एक भी टीका न लगा हो, दो साल से छोटे बच्चे जिनका कोई नियमित टीका छूटा हुआ हो का सर्वे किया जाएगा। डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसाइटी और इंटर डिपार्टमेंटल मीटिंग में इसका निर्णय लिया गया है। दो सदस्यीय जांच टीम में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रहेंगी। वह प्रतिदिन अपने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को रिपोर्ट करेंगी। अधिकारी प्रतिदिन हमें रिपोर्ट करेंगे और रोगी मिलने पर जांच और उपचार की प्रक्रिया करेंगे। टीकाकरण का प्लान बनाएंगे। इसके अलावा जिले की सभी सीएचसी और पीएचसी पर रैपिड डायग्नोस्टिक किट उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें मलेरिया, डेंगू, टाइफड की जांच किट हैं। इसके अलावा प्रतिदिन दो हजार आरटीपीसीआर और 12 सौ जांचें एंटीजन के माध्यम से हो रही हैं। राहत की बात है कि नए केस नहीं मिले हैं।
डॉ. एमसी गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी