मुरादाबाद। प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर आनन-फानन निकाली गई करोड़ों रुपये की धनराशि में गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अमर उजाला द्वारा इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किये जाने के बाद कमिश्नर और उपनिदेशक पंचायती राज के आदेश पर नवागत डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी द्वारा की जा रही जांच में प्रथम दृष्ट्या गडबड़ी मिली है।
जिले के तीन विकास खंडों बिलारी, भगतपुर और छजलैट में प्रशासकों द्वारा कराए गए करीब 3.83 करोड़ रुपये के भुगतान में ही 1.04 करोड़ रुपये का भुगतान संदिग्ध पाया गया है। जिसके बाद डीपीआरओ ने तत्कालीन प्रशासकों व पंचायत सचिवों से स्टीमेट, व्यय बाउचर, एमबी, टेंडर पत्रावली, मस्टर रोल आदि की प्रमाणित प्रति की तलब कर ली है। डीपीआरओ की इस कार्रवाई से हड़कंप मचा है।
पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही जिले में 25 दिसंबर 2020 से 25 मई 2021 तक ग्राम पंचायतों के प्रशासक मालिक रहे। इस दौरान जिले के सभी आठ विकास खंडों में इस अवधि में प्रशासकों ने करीब 38 करोड़ रुपये खर्च किये थे। अमर उजाला ने जब इसकी जमीनी हकीकत परखी तो भारी अनियमितता सामने आई। कहीं बिना कार्य कराए भुगतान कर दिया गया तो कहीं बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए तो कहीं वित्तीय स्वीकृति को नजर अंदाज कर भुगतान किया गया पाया गया।
तत्कालीन डीपीआरओ की जांच में भी इसका खुलासा हुआ, लेकिन वह खुद छजलैट के प्रशासक रहे थे, लिहाजा वह कमियों को छुपाते रहे। जिले में करोड़ों रुपये के खरीदे गए वाटर कूलर, फागिंग मशीन में भी भारी कमीशनखोरी के आरोप लगे। जिसके बाद कमिश्नर, निदेशक पंचायतीराज और डीएम ने भी जांच के आदेश दिये, लेकिन जब तक पूर्व डीपीआरओ कुर्सी पर रहे जांच की गोरमोल रिपोर्ट भेज मामले को दबाते रहे। उनके स्थानांतरण के बाद नवागत डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने भी उच्चाधिकारियों के आदेश पर अपने स्तर से जांच शुरू की तो गड़बड़ी उजागर होती गई। उन्होंने विकास खंड बिलारी, भगतपुर और छजलैट में प्रशासकों के कार्यकाल में विकास कार्य के नाम पर खर्च की गई धनराशि की पड़ताल के लिए एक अप्रैल से 31 मई तक के भुगतान की पड़ताल की तो 38380299 रुपये के भुगतान में 10485533 रुपये का भुगतान संदिग्ध पाया गया। जिस पर डीपीआरओ ने संबंधित प्रशासकों व पंचायत सचिवों से स्टीमेट, व्यय बाउचर, एमबी, टेंडर पत्रावली, मस्टर रोल आदि की प्रमाणित प्रति तलब की है।