मुरादाबाद। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सेहत सुधार से लेकर प्ले ग्रुप मॉड्यूल के तहत उन्हें स्कूल पूर्व शिक्षा बड़े-बड़े दावे तो सरकार कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर है। हालात यह है कि जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन में चल रहे हैं, जिनमें कहीं बिजली, पानी की सुविधा का अभाव है तो कहीं टॉयलेट की दिक्कत। कहीं बच्चे तिरपाल पर बैठने को मजबूर हैं तो कहीं भवन किराए पर लिया गया भवन इतना छोटा है कि उसमें पंजीकृत बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर बैठ भी नहीं सकते हैं।
जिले में 2770 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 1.77 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में करीब करीब 1000 केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों के लिए सरकारी भवन हैं। शहर क्षेत्र में 651 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन इनमें से कुल नौ केंद्र सरकारी भवन में चलते हैं। शेष 642 भवन किराए के हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी 90 भवन किराए के हैं। इससे साफ है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सेहत सुधारने से लेकर उन्हें प्ले ग्रुप मॉड्यूल स्कूल पूर्व शिक्षा का दावा समेत अन्य कई दावे भले ही सरकार कर रही हो, लेकिन इन दावों को हकीकत में बदलने के लिए जो भवन चाहिए वह भी खुद का नहीं है। हालांकि विभाग की ओर से किराए का भवन लेकर केंद्र संचालित किए जाने की व्यवस्था है, लेकिन एक बड़ा कमरा, बड़ा किचन, टॉयलेट बाथरूम की सुविधा के वाले भवन का अधिकतम किराया 4500 रुपये निर्धारित है। लेकिन शहर में इन सुविधाओं वाला भवन इतने कम किराए में विभाग को मिल ही नहीं पा रहा है।
लिहाजा विभाग इसके लिए न्यूनतम किराए 750 रुपये अदा कर छोटे-छोटे एक कमरों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने को मजबूर है। किराया का भवन होने के कारण अधिकांश केंद्रों पर कहीं रोशनी का अभाव रहता है तो कहीं समुचित पेयजल की समस्या से बच्चे जूझते हैं। नगर शहर के मोहल्ला मऊ में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। एक छोटे से कमरे में संचालित होने वाले इस केंद्र पर 14 बच्चे पंजीकृत हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बबिता ने बताया कि केंद्र पर बिजली की सुविधा न होने के कारण गर्मी में उनका व बच्चों का बुरा हाल होता है। बच्चों के बैठने के लिए उन्होंने स्वयं पुष्टाहार की बोरियों को सिल कर तिरपाल बनाई है। उसी पर बच्चों को बैठाती हैं। शहर के मोहल्ला दौलतबाग में भी आंगनबाड़ी केंद्र किराए के एक भवन में चल रहा है। उसमें 22 बच्चे पंजीकृत हैं। कमरा इतना छोटा है कि यहां सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अगर बच्चे बैठाए जाएं तो बमुश्किल 10 बच्चे भी ठीक से नहीं बैठ सकेंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुमन जैन ने बताया कि मकान स्वामी से अनुरोध कर बच्चों के लिए एक बल्ब का कनेक्शन ले रखा है। मकान मालिक भी उसी मकान में रहते हैं लिहाजा उनसे अनुरोध कर इमरजेंसी में बच्चों के लिए टॉयलेट आदि भी खुलवा लेते हैं। पानी की भी सुविधा उन्हीं से प्राप्त कर लेते हैं। लेकिन कई बार बच्चों के शोर से मकान मालिक को दिक्कत भी होती है। अगर यही विभाग की अपनी खुद की बिल्डिंग में होता तो ऐसा नहीं होता। कमोवेश यही स्थित किराए के भवन मे चल रहे जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की है।
प्रोजेक्ट स्नेह के तहत 30 आंगनबाड़ी केंद्रों का किया सुंदरीकरण
जिले के विभिन्न विकास खंडों में सरकारी भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के सुंदरीकरण का कार्य भी विभाग की ओर से कराया गया है। इनमें विकास खंड छजलैट में 13, मूंढापांडे में 11, मुरादाबाद देहात में चार तथा मुरादाबाद शहर के एक आंगनबाड़ी केंद्र का सुंदरीकरण विभाग द्वारा किया गया है।
आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने के लिए विभाग में बजट की किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन शहरी क्षेत्र में सरकारी जमीन ही नहीं इसके लिए मिल पा रही है। शहर में नाम मात्र के जो प्राथमिक विद्यालय हैं भी तो उनमें आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के लिए जगह का अभाव है। कई बार इसके प्रयास किए जा चुके हैं कि शहर में सरकारी जमीन मिल जाए, लेकिन संभव नहीं हो सका। किराए के भवन के लिए सर्वाधिक 4500 रुपये किराया निर्धारित है। इस किराए में बड़े भवन, पेयजल, टॉयलेट, किचन आदि की बेहतर सुविधाओं का होना जरूरी है। इतने कम किराए में शहर में मकान नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा न्यूनतम किराया 750 रुपये पर एक छोटा कमरा किराए पर लेकर कार्य कराया जा रहा है। भवन सरकारी हो इसके लिए लगातार उच्चाधिकारियों के माध्यम से सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। -डॉ. अनुपमा सांडिल्य, जिला कार्यक्रम अधिकारी