‘मिशन मोदी’ की सफलता को भाजपा ने एक बार फिर भगवान राम के नाम का सहारा लेने का फैसला किया है।
राम मंदिर मुद्दे को गरमाने की जमीन तैयार करना शुरू हो गया है।
भगवा खेमे के सहयोगी संगठनों की भूमिकाएं तय की जा रही हैं। मुख्य जिम्मेदारी विहिप पर डाली गई है। जिससे वह इस मिशन को पूरा करने के लिए संतों के सहारे भगवा एजेंडे को धार देकर माहौल को गरमा सके।
इसका प्रारंभ 25 अगस्त को अयोध्या में संतों की 84 कोसी जनजागरण यात्रा से होगा।
यह यात्रा 25 अगस्त को बस्ती जिला के मखौड़ा नामक स्थान से शुरू होगी। यह स्थान मनोरमा नदी के किनारे हैं।
कहा जाता है कि यहीं पर महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्त करने की कामना से पुत्रेष्टि यज्ञ की थी।
मखौड़ा के बाद यह यात्रा बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, अंबेडकरनगर व फैजाबाद के गांवों से होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा 13 सितंबर कोअयोध्या में समाप्त होगी।
यात्रा में प्रत्येक दिन अलग-अलग राज्यों से संतों की टोलियां शामिल होंगी। यह टोलियां लोगों से अयोध्या के इर्द-गिर्द 84 कोस में कोई नई मस्जिद न बनने देने का लोगों से आह्वान करेंगे।
इसके लिए कई जगह सभाएं भी की जाएंगी। जिन्हें प्रमुख लोग संबोधित करेंगे।
माना जा रहा है कि विहिप के 18 अक्टूबर से मंदिर निर्माण के ऐलान और उससे पहले इस जनजागरण यात्रा का फैसला ‘मिशन मोदी’ को सफल बनाने की रणनीति का ही हिस्सा है।