यूपी के लोगों को हिंसा खूब लुभा रही है। पुलिसवालों पर भी गोली चलाने से न हिचकने की वारदात इसकी तस्दीक कर रही हैं।
छोटी सी बात पर जान ले लेना। मामूली विवाद में गोली चला देना।
बात बेबात झगड़ जाना यूपी वालों को कुछ ज्यादा ही भा रहा है। यह सच सामने आया है कि नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 में वॉयलेंट क्राइम के सबसे ज्यादा 33824 मामले दर्ज हुए।
जो कुल अपराधों का लगभग 12.3 प्रतिशत हैं। अकेले प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ही 98 मर्डर हुए। ताजनगरी आगरा हिंसक अपराध के कुल मामलों में सबसे आगे है।
एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में यूपी ऐसा प्रदेश है जहां एक वर्ष में सबसे ज्यादा 4966 मर्डर की वारदात हुई। मरनेवालों में 50 प्रतिशत से ज्यादा ऐसे हैं जिनकी उम्र तीस साल से भी कम है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ पल्लवी भटनागर कहती हैं कि यूपी तेजी से विकसित हो रहा राज्य है। इस विकास ने काफी विषमताएं पैदा कर दी हैं। यहां के युवाओं में दिल्ली और मुंबई के युवाओं से होड़ है।
समाजशास्त्री डॉ बीबी मलिक कहते हैं कि यूपी में हिंसक अपराध बढ़ने की तीन खास वजहे हैं- पहली है सामाजिक संरचना का टकराव, सामंती मानसिकता और अपराध को राजनीति का संरक्षण। सरकार ने इसे सुधारने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
यूपी में सबसे ज्यादा बनते गोलियों का शिकार
देशभर में यूपी ऐसा प्रदेश है जहां हत्याओं के लिए सबसे ज्यादा लाइसेंस और अवैध असलहों का इस्तेमाल होता है।
प्रदेश में एक साल में 1724 लोगों की हत्या असलहों से की गई। इसमें 149 वारदात लाइसेंसी और 1575 अवैध असलहों से की गईं।