मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में निकले हुए कूड़ों के निस्तारण के लिए बनी सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना अधर में लटकी हुई है। लगभग 10 वर्ष पूर्व बनी योजना आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इसकी मुख्य वजह दो निर्माण कंपनियों की आपसी लड़ाई मानी जा रही है।
नगर पालिका परिषद मिर्जापुर की महत्वाकांक्षी योजना सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (एसडब्लूएमपी) दो कंपनियों की आपसी लड़ाई का शिकार हो गई है। इस योजना का बंटाधार तो हुआ ही करोड़ों की मशीनें भी पड़े- पड़े जंग खा रही हैं। नगर पालिका क्षेत्र से रोजाना निकलने वाले 142 टन कूड़े के निस्तारण के लिए वर्ष 2011 में नगर पालिका परिषद की ओर से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट योजना तैयार की गई थी। इसके तहत नगर में निकलने वाले कूड़े से बिजली तैयार करने व खाद बनाने का संयंत्र स्थापित किया जाना था। इसके लिए 11.20 करोड़ की लागत से एक संयंत्र नगर विकास खंड के टांड़ गांव में लगना शुरू हुआ। इसके लिए शासन की ओर से कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को कार्य कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सीएनडीएस ने कार्य कराना शुरू किया।
योजना के मुताबिक कूड़ों से एक मेगावाट बिजली का उत्पादन होना था और उसके अवशिष्ट से खाद बनाया जाना था। साथ ही निकलने वाली पानी का शोधन कर खेत की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होना था। इसके लिए शासन की ओर से कार्यदायी संस्था को साढ़े छह करोड़ रुपये भी दे दिए गए थे। काम शुरू हो गया था। इसी बीच कार्यदायी संस्था ने यह कार्य ए टू जेड कंपनी को दे दिया और बजट को लेकर उन दोनों कंपनियों में विवाद हो गया। दोनों कंपनियां न्यायालय चली गईं। इसी के बाद काम ठप हो गया और आज तक वह कार्य शुरू नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये की मशीनों में धूप और पानी के साथ जंग लग रहा है। पालिका प्रशासन का कहना है कि मामला न्यायालय में है। इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता। हां, यह जरूर है कि इससे कूड़ा निस्तारण की मुहिम को झटका जरूर लगा है।नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ओमप्रकाश का कहना है कि इस बारे में विस्तृत जानकारी शासन को भेजी गई है।
आसपास के ग्रामीण विरोध करते हैं
मिर्जापुर। प्लांट के लिए इसी गांव में स्थित परिसर में कूड़ा डंप किया जा रहा है। प्लांट शुरू नहीं हो पा रहा है। इसलिए प्राय: आसपास के ग्रामीण इस स्थान पर कूड़ा डंप करने का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि इससे सड़न व बदबू पैदा हो रही है।