पुरानी पेंशन नीति की बहाली की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को कर्मचारियों, शिक्षकों व अधिकारियों ने पेंशनर्स अधिकार मंच के तत्वावधान में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में संगठन के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर सभी घटक संगठन शामिल हुए। सभी ने एक स्वर से पुरानी पेंशन नीति बहाल करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं किए जाने पर कर्मचारी संगठन कड़ा निर्णय लेने को बाध्य होंगे।
संगठन के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधि स्वयं पुरानी पेंशन ले रहे हैं, लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से वंचित कर दिया गया है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि सरकार अविलंब निर्णय ले, अन्यथा कर्मचारियों को कड़ा निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी को मांगों से संबंधित ज्ञापन भी दिया।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ने कहा कि संविधान में पेंशन की व्यवस्था केवल कर्मचारियों, अधिकारियों व शिक्षकों के लिए थी, लेकिन उनकी पेंशन बंद कर दी गई। सांसद व विधायकों को केवल वेतन व भत्ते की बात कही गई थी, लेकिन सांसदों व विधायकों ने अपने लिए तो पुरानी पेंशन ले लिया और कर्मचारियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल नहीं करती है तो बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। परिषद के पूर्व अध्यक्ष लल्लू तिवारी ने लोगों का उत्साहवर्धन किया। गणेश प्रसाद, रामअचल सिंह, नीलकांत पांडेय, धीरेंद्र सिंह, बेनू यादव, विजय शंकर त्रिपाठी, दीपक सिंह, सर्वेश प्रीतम, अशोक धर दुबे, कमलकुंज चौबे, पूनम सिंह, अजेश्वर सिंह, चंद्रशेखर मिश्रा, राकेश तिवारी ने भी पुरानी पेंशन बहाली के लिए आवाज बुलंद की। कहा कि मांगों को पूरा नहीं किया गया तो सभी कर्मचारी व शिक्षक मिलकर सरकार बदलने से भी गुरेज नहीं करेंगे। शिक्षकों व कर्मचारियों ने मानसिक व आर्थिक शोषण का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ भी आवाज बुलंद की। धरने में केदारनाथ दुबे, उमाकांत मिश्रा, प्रशांत मिश्रा, मंगला सिंह, इंद्रभूषण उपाध्याय, सर्वेश मौर्य, पन्नालाल यादव, कृष्ण कुमार मिश्रा, अशोक मौर्य, राजेंद्र यादव, शान मोहम्मद, अवनीश उपाध्याय, आलोक तिवारी आदि शामिल थे।