बारिश से गेहूं की बुवाई पिछड़ी
बिजनौर। पिछले माह हुई बारिश से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई अब तक नहीं हुई है। बारिश से गेहूं की बुवाई अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है। जिले में अब तक केवल तीन हजार हेक्टेयर जमीन में ही गेहूं की बुवाई हो पाई है, जबकि इस बार गेहूं बुवाई का लक्ष्य करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर रखा गया है। खादर में अब भी खेतों में इतनी नमी है कि गेहूं की बुवाई मुश्किल बताई जा रही है।
जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन में गेहूं बोया जाता है। जिले में आमतौर पर अगस्त के बाद बारिश नहीं होती है लेकिन पिछले महीने अक्तूबर में तीन दिन में ही रिकॉर्ड बारिश हुई। बारिश से धान की फसल को बहुत नुकसान हुआ। जब बारिश हुई तब मिलों के चलने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी थी लेकिन बारिश ने ताल बिगाड़ दिया। मिलों का पेराई सत्र 15 से 20 दिन तक लेट हो गया। बाद में भी गन्ने में मिठास कम निकली तो मिलों ने पूरी क्षमता से गन्ने की पेराई नहीं की। किसान शुरुआत में धान और गन्ने के खाली हुए खेतों में गेहूं बोते हैं, लेकिन धान के खेतों में पानी भरने और गन्ने के खेत खाली न होने की वजह से गेहूं की बुवाई बुरी तरह पिछड़ गई है। जिले में 15 नवंबर तक ढाई हजार हेक्टेयर गेहूं ही बोया गया था, जबकि बारिश अगर न होती या हल्की होती तो धान की बुवाई 50 हजार हेक्टेयर से अधिक हो जाती।
बीज का उठान भी कम
गेहूं की बुवाई शुरू न होने से बीज का उठान भी कम हो रहा है। कृषि विभाग के केंद्रों पर गेहूं का पीबीडब्ल्यू वन जेडएन, डब्ल्यूएच 1124, पीबीडब्ल्यू 343, डीबीडब्ल्यू 222, डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 173, एचडी 2967, एचडी 3086, पीबीडब्ल्यू 723, पीबीडब्ल्यू 550, एचडी 3226 के आधारीय और प्रमाणिक बीज उपलब्ध हैं।
गेहूं की बुवाई पर पड़ा असर
जिला कृषि अधिकारी डॉ.अवधेश मिश्र के अनुुसार अब किसान गेहूं की बुवाई तेजी से कर रहे हैं। बारिश और मिलों का संचालन प्रभावित होने की वजह से गेहूं की बुवाई पर असर पड़ा है।