इस ठंड में सहारनपुर का तापमान शिमला और नैनीताल से भी नीचे आ गया था, ऐसे सर्द मौसम में महंत मंगलनाथ सुबह और शाम पांच बजे से लेकर आठ बजे तक तीन-तीन घंटे जल तपस्या करते हैं। इस दौरान वह गुरु गोरखनाथ का नाम जपते हैं।
बकौल महंत मंगलनाथ, वह 2017 से लगातार सर्दी के मौसम में नदी में खड़े होकर जल तपस्या और गर्मियों में अग्नि तपस्या करते हैं। राम मंदिर निर्माण को लेकर कहना है कि यह 500 वर्षों के संघर्ष का फल मिला है।
नाथ संप्रदाय की तपोस्थली है रोहतक का अस्थल बोहर मठ
मूलरूप से शामली के यारपुर गांव के रहने वाले महंत मंगलनाथ ने 11 साल पहले दीक्षा ले ली थी। उनके गुरु महंत फूलनाथ और दादा गुरु गोवर्धननाथ रोहतक स्थित अस्थल बोहर मठ में समाधिलीन हैं। यह मठ नाथ संप्रदाय की तपोस्थली है।
महंत मंगलनाथ का कहना है कि गुरु के आशीर्वाद से शुरुआत में तीन साल घड़े से जल तपस्या की थी, जिसमें घड़े में पानी लेकर सिर पर डालते थे। 2017 से लगातार नदी और नहर में जल तपस्या कर रहे हैं। पहली बार बेहट नहर में जल तपस्या की थी।
इसके बाद कई अलग-अलग नदी और नहरों में जाकर हर साल 40 दिन की जल तपस्या करते हैं। जल तपस्या के माध्यम से वह राम मंदिर निर्माण और देश की सीमा पर खड़े जवानों की रक्षा के लिए अर्जी लगाते हैं।
26 जनवरी को खत्म होगी जल तपस्या
महंत मंगलनाथ का कहना है कि इस बार जल तपस्या 15 दिसंबर से शुरू की थी। उनकी जल तपस्या 25 जनवरी को खत्म हो जाएगी, लेकिन विधि-विधान के साथ इसका समापन 26 जनवरी को सावलपुर नवादा स्थित श्रीराम जानकी डेरे में भंडारा लगाकर किया जाएगा।