जैसे हाउस वाइफ का काम कोई नौकरी नहीं है, ठीक वैसे ही हाउस हसबैंड होना या बनना कोई कॅरिअर नहीं है। बावजूद इसके सुबह से लेकर शाम तक कोई न कोई काम लगा रहता है। कोई नोटिस करे या न करे, लेकिन खुद और पैरों को पता रहता है कि वह ड्यूटी पर है। ‘हाउस हसबैंड ऑन ड्यूटी’ पुस्तक कुछ इन्हीं संस्मरणों का पुलिंदा है। पुस्तक के लेखक विपिन धनकड़ ने अपने अनुभवों को किताब का रूप दिया है।
पुस्तक का विमोचन शुक्रवार को मेरठ में निंबस बुक स्टोर पर आरजी गर्ल्स डिग्री काॅलेज की प्राचार्य डॉ. निवेदिता मलिक, सीसीएसयू के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी ने किया।