नई शिक्षा नीति वैसे तो सभी स्कूलों में लागू हो चुकी हैं, लेकिन अभी कुछ और बदलाव उसके तहत होने बाकी हैं। आज बेहद जरुरी हो गया है कि बच्चों और उनके अभिभावकों का रुझान कोचिंग सेंटर से कम किया जा सकें। यह तभी संभव हो सकता हैं जब स्कूल की शिक्षा प्रणाली में कुछ और बदलाव हो। यह बात शुक्रवार को केएल इंटरनेशनल स्कूल पहुंचे सीबीएसई एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज ने कही।
उन्होंने डमी एडमिशन पर तंज कसते हुए कहा कि देखने में आ रहा है कि स्कूलों में डमी एडमिशन अधिक हो रहे हैं, जिसका कारण कोचिंग है। क्योंकि अभिभावक आठवीं पास करने के बाद से ही बच्चें को या तो मेडिकल या फिर इंजीनियरिंग की राह पर डाल देते है और डमी एडमिशन का सहारा ले वह बच्चों का या तो कोटा भेज देते है या फिर फिटजी जैसे कोचिंग संस्थान में कोचिंग कराने लगते है।
इतना ही नहीं अभिभावक इसको इस्टेट्स सिंबल भी मान रहे है। मगर वह यह नहीं समझ रहे कि इससे बच्चों में संस्कार विकसित नहीं हो पा रहे है। क्योंकि संस्कार या तो घर से मिलते है या फिर स्कूल से। डॉ. संयम भारद्वाज ने यह भी कहा कि स्कूलों को बारीकी से समझाया जाता है कि एलओसी को सही तरीके से भरें। बच्चे, माता पिता का नाम चेक कर लें। इसके अलावा फार्म भरते समय हस्ताक्षर भी करवाए जाते हैं, लेकिन फिर भी स्कूलों की गलतियां आती हैं और एक दो पत्र हर जिले से प्राप्त हो जाते हैं कि नाम सही कर दीजिए या फिर बदल दीजिए।
इसलिए एलओसी को भरते समय बहुत बारीकी से चेक करें, क्योंकि सीबीएसई बहुत समय देती है। साथ ही पादर्शिता रखे, स्कूल में उपस्थिति वाले छात्रों को ही बैठने दें, जिनकी उपस्थिति बिना कारण बताए व डमी एडमिशन के चलते उपस्थिति कम रहती है, उन्हें रोक दीजिएगा। अनुपस्थित रहने का स्पष्ट कारण, कागजात, प्रूफ सभी कुछ होना चाहिए। बच्चे को जानबूझ कर मेंटल डिसेबल बताकर फर्जी कागज बनाकर अतिरिक्त समय के चक्कर में यह कार्य हो रहा है, जो कि गलत है।