बातचीत ढाई घंटे तक चली। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि किसानों से मशवरा किया जाएगा। आंदोलन किसी एक का नहीं है, इसलिए जब तक सभी किसान सहमत नहीं होंगे, वह यहां से धरना नहीं उठा सकते। दिल्ली में हुए हंगामे में बागपत का कोई किसान नहीं था। असामाजिक तत्वों ने वहां पर माहौल बिगाड़ा है, पुलिस उन्हें पकड़े, किसानों को झूठा बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
इसके बाद किसान धरनास्थल पर पहुंचे। धरने पर पहुंचकर अधिकारियों के साथ हुई वार्ता का हाल किसानों को बताया गया। किसानों में रोष व्याप्त हो गया। उधर देर रात प्रशासन के आदेश पर पुलिस ने धरनास्थल पहुंचकर किसानों को जबरन वहां से उठाया। इस दौरान पुलिस ने किसानों पर हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान कई किसान मामूली रूप से घायल भी हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट जयवीर सिंह तोमर ने बताया कि किसान शांतिपूर्ण धरना कर रहे हैं। जिले का प्रत्येक किसान निर्दोष है। सरकार असली दोषियों को पकड़ें। तय किया गया कि 31 जनवरी को महापंचायत होगी। इस दौरान दरियाव सिंह, पूर्व विधायक वीरपाल राठी, पूर्व विधायक अजय, सुरेश मलिक, विकास बाछौड़, विनोद, सतबीर सिंह, सभासद आशुतोष तोमर विकास मलिक एडवोकेट, सुमेर आर्य, विपिन ढिकाना, अशोक, ओमप्रकाश मौजूद रहे।
हिंसक झड़प में शामिल किसानों की होगी जांच
दिल्ली की ट्रैक्टर रैली में शामिल होने के लिए गए जिले के कुछ किसान भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर झड़प में शामिल रहे किसानों की पहचान कर रही है।
जिले से बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों पर सवार होकर किसान गाजीपुर और सिंघु बार्डर गए थे। दिल्ली में हिंसक झड़प के बाद किसान वापस लौट आए हैं।
दिल्ली पुलिस ने मुकदमें दर्ज करने शुरू कर दिए हैं और किसानों की पहचान की जा रही है। स्थानीय पुलिस को इनपुट मिला है कि जिले के कुछ किसान भी लाल किले पर पहुंचे थे। इन किसानों की भूमिका की जांच की जाएगी। एसपी अभिषेक सिंह का कहना है कि दिल्ली पुलिस अगर सहयोग मांगती है तो पूरी जानकारी दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर सूचनाएं एकत्र की जा रही है।