मेरठ सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पड़ा असर
पश्चिमी यूपी के मेरठ मंडल की मेरठ मंडी समिति सहित 22 मंडियों से सरकार को वर्ष 2019-20 में लगभग 96 करोड़ रुपये मंडी शुल्क के रूप में मिले थे। जो अब अब वित्तीय वर्ष 2020-21 में घटकर 46 करोड़ रह गए हैं। कुछ व्यापारियों ने तो यहां तक आशंका जताई है कि इन हालात में मंडियों पर ताला लटक जाएगा। क्योंकि जिनता खर्च मंडी समितियों में स्टाफ के वेतन पर किया जा रहा है, मंडी शुल्क से उतनी आय नहीं हो रही है।
मंडियों के अंदर भी चल रहा खेल समिति की आय पर भी असर
सूत्रों के अनुसार मंडी के कुछ व्यापारी मंडी के अंदर अपनी दुकान पर आने वाले कृषि उत्पाद की खरीद फरोख्त करने के बाद भी इस कारोबार को मंडी से बाहर दिखा रहे हैं। इसका सीधा असर मंडी समिति की आय पर पड़ रहा है। इस खेल पर अंकुश लगाना भी जरूरी है।
मंडी में माल बेचने के ये होते रहे हैं फायदे
-मंडी समिति की ओर से भी किसान की उपज का निर्धारित किया जाता था रेट
-निर्धारित रेट से कम में किसान की कृषि उपज को नहीं बेचते थे व्यापारी
-आपसी प्रतिस्पर्धा का लाभ भी मंडी में आए किसानों को मिलता था
-मनमानी करने पर मंडी समिति अधिकारियों से शिकायत का विकल्प
-किसान की शिकायत पर मंडी समिति अधिकारी संबंधित व्यापारी का कर सकते थे लाइसेंस निरस्त,
-मंडी में किसान के ठहरने, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा की मिलती रही है सुविधा
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मंडी से बाहर ये हैं दिक्कतें
-मंडियों से बाहर पहले भी किसान अपनी कृषि उपज गेहूं, धान, दलहनी फसलें बेचता था, लेकिन माल बेचते समय केवल एक ही व्यापारी के भाव पर माल बेचना पड़ता था। वही स्थिति अब भी है।
-किसानों में आशंका है कि बाहर माल बेचने पर व्यापारी पूल बना सकते हैं और मनमानी कर सकते हैं।
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सिमट रहा कारोबार
नए कृषि कानूनों ने मंडी में कारोबार को समेट दिया है। ये कानून न किसान के हित में हैं और न व्यापारी के। किसान अपने हित की ही नहीं बल्कि व्यापारी हित की भी लड़ाई लड़ रहे हैं। इन कानूनों से सरकारी कर्मचारियों की जेब भरने का काम आसान हुआ है।
- नवीन गुप्ता, अध्यक्ष, व्यापार संघ मेरठ
चल रही मनमानी
उत्तर प्रदेश सहित कई भाजपा शासित प्रदेशों में इन कृषि कानूनों पर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। बड़े व्यापारी मनमाने दाम में कृषि उपज खरीद रहे हैं। किसान सहित आम जनता को लुटने से बचाने की लड़ाई हम लड़ रहे हैं।
- नरेश टिकैत, अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन