नरक चतुर्दशी आज, पाप से मुक्ति दिलाता है नरक चतुर्दशी व्रत
मेरठ। दीपावली से एक दिन पहले बुधवार को नकर चतुर्दशी का व्रत का विधान पूरा होगा। यह व्रत पाप और नरक से मुक्ति दिलाता है। इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। माना जाता कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर उबटन लगाकर और तेल सहित स्नान करने से वर्षभर सौंदर्य में वृद्धि
होती है। चतुर्दशी के दिन नए पीले रंग के वस्त्र पहन कर यम का पूजन करें। इससे अकाल मृत्यु एवं नरक में जाने का भय नहीं रहता।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रालॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इस दिन यमराज और बजरंग बली की पूजा का विशेष विधान है। तीन नवंबर को यह पूजन होगा।
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सूर्योदय से पहले उठने और स्नान का महत्व
व- इस तिथि पर व्रत एवं पूजन से यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता है। वैसे तो कार्तिक मास में तेल नहीं लगाना चाहिए, फिर भी इस तिथि को शरीर में तेल लगाकर स्नान करना चाहिए। शुद्ध वस्त्र पहनकर, तिलक लगाकर दक्षिणाभिमुख होकर पूजन और तिल युक्त तीन-तीन तिलांजलि देनी चाहिए। यह यम-तर्पण कहलाता है। इससे वर्षभर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। इसलिए इस चतुर्दशी का नाम नरक चतुर्दशी पड़ा।
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देवताओं की प्रतिमा स्थापित करने का विधान
- इस दिन छह देवी-देवताओं यमराज, श्रीकृष्ण, काली मां, भगवान शिव, हनुमान जी और वामन की पूजा का विधान है। ऐसे में घर के ईशान कोण में इन सभी देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित कर विधिविधान से पूजा करें। सभी देवी देवताओं के सामने धूप दीप जलाएं, कुमकुम का तिलक लगाएं और मंत्रो का जाप करें।
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यह रहेगा तिथि का समय
- बुधवार प्रात: 09:02 बजे से नरक चतुर्दशी आरंभ होगी। बृहस्पति सुबह 06:03 बजे समाप्त होगी। दोपहर 01.33 से 02.17 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा। पूजा पाठ के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय है। इसके साथ शाम 07:10 से 08:25 बजे तक यम और अकाल मृत्यु से बचने के लिए दीपदान करें।
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पूजन का उपयुक्त समय
- शुभ चौघड़िया ( व्यापारी प्रतिष्ठान पूजन ) - सुबह 10:40 से 12:01 बजे तक
- कुंभ चौघड़िया ( थोक व्यापारी पूजा समय ) - दोपहर 1:44 से 3:11 बजे तक
- लाभ चौघड़िया ( उद्यमियों का पूजा समय) - शाम 4:10 से 5:32 बजे तक
- वृक्ष स्थिर लग्न ( गृहस्थ का पूजा समय ) - शाम 6:11 मिनट से 8:07 बजे तक