इसके बाद पूनम व सुनील सात मई को रिक्रूटमेंट ऑफिस हेड क्वार्टर 236 एमजी रोड लखनऊ कैंट पहुंचे तो उनको जानकारी हुई कि ज्वाइनिंग लेटर फर्जी है। सुनील ने फोन करके सत्यपाल को बताया कि उसने फर्जी ज्वाइनिंग लेटर दिया है तो वह कहने लगा कि तुम मुझे बिना बताए कैसे ज्वानिंग करने चले गए। सुनील ने अपने रुपये वापस मांगे तो वह इंकार करने लगा। इसके बाद उन्होंने एसटीएफ मेरठ फील्ड यूनिट से उसकी शिकायत की।
आरोपी के पास से क्या हुआ बरामद
एसटीएफ मेरठ फील्ड यूनिट ने मिलिट्री इंटेलीजेंस के इनपुट पर उसे गिरफ्तार किया। आरोपी सत्यपाल सिंह यादव सेना में चालक पद से रिटायर्ड है। वह कर्नल डीएस चौहान के नाम की प्लेट लगाकर युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। आरोपी के पास से पांच ज्वाइनिंग लेटर, पांच स्टांप, एक प्रिंटर, एक कर्नल की वर्दी और एक फर्जी पहचान पत्र बरामद हुआ है। वह कई राज्यों के युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपी के खिलाफ गंगानगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
एसटीएफ के एसपी बृजेश सिंह ने बताया कि गंगानगर के कसेरूबक्सर का रहने वाला सत्यपाल सिंह यादव पुत्र करण सिंह सेना में चालक पद से रिटायर हुआ था। वह पुणे में तैनात कर्नल डीएस चौहान की गाड़ी चलाता था। रिटायर होने के बाद सत्यपाल सिंह ने कर्नल डीएस चौहान के नाम की प्लेट बनवाई। कर्नल की वर्दी पहनकर एक फर्जी फोटो आईडी भी तैयार कर ली। इसके बाद उसने सेना में भर्ती होने के इच्छुक युवाओं का ठगना शुरू कर दिया। खुद का नाम कर्नल डीएस चौहान बताकर अपनी पोस्टिंग पुणे में बताता था। इतना ही नहीं आरोपी ने बहुत से युवाओं से मोटी रकम लेकर उनको फर्जी नियुक्ति पत्र भी दे दिए।
बताया गया कि पिछले सात साल में उसने बहुत से युवाओं से ठगी करके करोड़ों रुपये की रकम हड़प कर ली। शिकायत पर एसटीएफ और मिलिट्री इंटेलीजेंस सत्यपाल सिंह के पीछे लगी थी। वहीं, साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। सत्यपाल सिंह के घर से कई बैंकों की चेकबुक मिली हैं। कर्नल डीएस चौहान नाम का फर्जी परिचय पत्र भी बरामद हुआ है। आरोपी से पुलिस पूछताछ कर रही है।
2003 में हुआ था रिटायर, 10वीं फेल है आरोपी
एसपी के मुताबिक, सत्यपाल भारतीय सेना में वर्ष 1985 में भर्ती हुआ था। 2003 में नायक एम्टी ड्राइवर के पद से रिटायर हुआ था। वो 10वीं फेल है। उसकी पोस्टिंग मेरठ, लखनऊ सेंटर, सिक्किम, अमृतसर, श्रीनगर में रही है। रिटायर होने के तीन साल बाद उसको पैरालिसिस हो गया था। इससे पहले भी आरोपी के खिलाफ इंचौली थाने में 2019 में आईपीसी की धारा 420, 406, 506 में मुकदमा दर्ज हुआ था।
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