राज्य में पहली लहर में सीरो सर्वे कराया गया था। इसमें 11 जनपदों के लोगों का रैंडम खून का नमूना लिया था। इन सैंपल की जांच केजीएमयू में हुई थी। पिछली बार अगस्त 2020 में लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद, मेरठ, गोरखपुर, बागपत व गाजियाबाद का सर्वे कराया गया था। बताया गया था कि हर पांचवें व्यक्ति में एंटीबाडीज मिली थी।
अभी रिपोर्ट का इंतजार
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि सीरो सर्वे अगली लहर की तैयारी के लिए किया जाता है। इस सर्वे के नतीजे के आधार पर संक्रमण का फैलाव पता चलता है। सामुदायिक सर्वे के नतीजे के अध्ययन के आधार पर शासन भविष्य में रोग की रोकथाम के लिए कार्ययोजना बनाता है।
3098 सैंपलों की जांच, कोरोना का कोई मरीज नहीं
मेरठ जिले में सोमवार को 3098 सैंपलों की जांच हुई। इनमें कोरोना का कोई मरीज नहीं मिला। सक्रिय केस 8 हैं। इनमें से पांच अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि दो होम आइसोलेशन में हैं। एक लापता है। अब तक 66007 लोगों को कोरोना की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 65157 की छुट्टी हो चुकी है।
आज 75 बूथों पर होगा टीकाकरण
जिले में सोमवार को 17 स्थानों पर 3514 लोगों ने कोरोना से बचाव का टीका लगवाया। जन्माष्टमी त्योहार के कारण कम बूथों पर टीकाकरण कराया गया। मंगलवार को 75 स्थानों पर 24750 लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा छह सितंबर को भी फिर से मेगा टीकाकरण अभियान चलाने की तैयारी है।
इससे पहले अगस्त माह में तीन बार मेगा अभियान चलाया गया और इन तीन दिनों में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन लगवाई। जिले में अब तक 13 लाख 35 हजार 229 लोग कोरोना से बचाव की पहली डोज लगवा चुके हैं, जबकि इनमें से दूसरी डोज लगवाने वालों की संख्या भी तीन लाख 93 हजार 533 पहुंच चुकी है।
अब ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले लाभार्थियों को टीकाकरण में प्राथमिकता दी जा रही है। सुबह 10 से दोपहर दो बजे तक ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। कुल टीकाकरण में से 30 प्रतिशत ऑनलाइन और 70 प्रतिशत ऑन द स्पॉट पंजीकरण के लिए रखा गया है।
रिपोर्ट के आधार पर करेंगे तैयारी
मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि महिला, पुरुष और बच्चों के बराबर प्रतिशत में सैंपल लिए गए हैं। बच्चों और किशोरों के सैंपल 5 से लेकर 17 साल तक के हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों को हो सकता है खतरा
मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग का कहना है कि इस बार बच्चों को खतरा हो सकता है। दरअसल, न तो उनको वैक्सीन लगी है और न ही वे ज्यादा कोरोना की चपेट में आए, जिससे उनमें एंटीबॉडी नहीं बनी है।