वहीं, फर्जी तरीके से गांव के कुछ ऐसे लोगों को पकड़ा गया, जिन्होंने कभी मजदूरी नहीं की। ऐसे नाम पर रकम निकालकर उसे हड़प लिया गया। इस मामले के पकड़ में आने के बाद गांव की मिथलेया एवं उसके पति सुशील के नाम पर हर महीने रकम निकालकर हजम की जा रही है।
इसके अतिरिक्त गांव के एक पूरे परिवार की पुरुष व महिलाओं को मजदूर बना दिया गया। एडीओ पंचायत राजवीर सिंह का कहना है कि यदि काम में फर्जीवाड़ा पाया गया तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
उधर, एसडीएम सरधना अमित कुमार का कहना है कि मनरेगा में फर्जीवाड़ा संज्ञान में आया है। इसके लिए जांच कमेटी गठित की गई है। वह मौके पर जाकर विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन करेगी।
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