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Meerut News: उधार के धनुष से अभ्यास कर बनी तीरंदाज, मजदूरी करा रहे हालात, पढ़िए ये खास रिपोर्ट

Sat, 10 Oct 2020 06:01 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • मजदूरी करने को मजबूर राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज मनीषा गागट
  • स्टेट चैम्पियनशिप में अलग-अलग वर्ग में जीते थे नौ पदक
  • स्टेडियम में कोच और साथियों की मदद से करती हैं अभ्यास
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मजदूरी को मजबूर राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज मनीषा गागट - फोटो : अमर उजाला
जिन हाथों में आप रेत और सीमेंट का तसला देख रहे हैं, अगर इन हाथों में धनुष और बाण होता तो ये नई इबारत लिख रहे होते। असल में ये मजदूर नहीं राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज मनीषा गागट हैं। प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई मेडल भी जीत चुकी हैं। इसके बाद भी उनके पास खुद का धनुष-बाण खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। घर के खराब आर्थिक हालात उन्हें मजदूरी के लिए मजबूर कर रहे हैं। परिवार भी उन पर तीरंदाजी छोड़ने का दबाव बना रहा है।
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मजदूरी करती मनीषा गागट - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में रोहटा रोड फाजलपुर गांव निवासी 20 वर्षीय मनीषा गागट के पिता देवेंद्र गागट पेशे से चौकीदार हैं। कोरोनाकाल में नौकरी छूट गई तो घर में खाने के भी लाले पड़ गए।
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मजदूरी करती मनीषा गागट - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी मनीषा 2015 से तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। वो राज्य स्तर पर एक स्वर्ण, चार रजत, चार कांस्य पदक जीत चुकी हैं। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खेलो इंडिया में कांस्य पदक, जूनियर व सीनियर नेशनल और यूथ खेलो इंडिया में भी प्रतिभाग कर चुकी हैं। 

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मनीषा की मदद करते लोग - फोटो : अमर उजाला
मनीषा ने कैलाश प्रकाश स्टेडियम की कोच रहीं अनुपमा के धनुष से तीरंदाजी सीखना शुरू किया था। दो साल तीरंदाजी सीखने के बाद वह स्नातक के लिए गुरुनानक देव विवि अमृतसर चली गईं। वहां पढ़ाई के साथ विवि ने धनुष भी मुहैया कराया। स्नातक पूरा होने वाला है। ऐसे में धनुष भी विवि में जमा हो जाएगा। मनीषा अपने खेल से बेहद प्यार करती हैं। उन्हें लग रहा है कि आर्थिक समस्या के कारण उनका खेल छूट जाएगा। 

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एडवोकेट राम कुमार ने दिये 11 हजार रुपए - फोटो : अमर उजाला
साइकिल से जाती हैं स्टेडियम
रोहटा रोड से करीब आठ किलोमीटर साइकिल चलाकर मनीषा स्टेडियम पहुंचती हैं। इन हालातों में भी वो सुबह और शाम स्टेडियम जाती हैं। वहां साथियों के धनुष से अभ्यास करती हैं। स्टेडियम में भी टारगेट की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है।
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जीते ये अवार्ड - फोटो : अमर उजाला
प्रतियोगिता और पुरस्कार
- 2020 में भुवनेश्वर में आयोजित ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में कांस्य पदक।
- 2018-19 में सोनभद्र में आयोजित स्टेट चैम्पियनशिप में अलग-अलग वर्ग में नौ पदक।

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