मेरठ में अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट।
- फोटो : अमर उजाला
पांच मजदूरों की मौत का शायद ये मेरठ में इकलौता ऐसा मामला है, जिसमें मौका-ए-वारदात पर मिले सबूत, सबूत नहीं हैं। ये भी तब, जबकि एनडीआरएफ की टीम ने पुलिस, फायर बिग्रेड, प्रशासन और नगर निगम के सैकड़ों कर्मियों-अधिकारियों के सामने मलबे से स्काई बम और टॉय गन के भारी मात्रा में शॉट बरामद किए।
जिंदा तड़पते रहे मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
सबको बताया कि यहां पटाखों का काम हो रहा था। इनकी बरामदगी के सारे वीडियो-फोटो सैकड़ों लोगों के फोन में सबूत के तौर पर दर्ज हुए। लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी सब खामोश हैं। फायर बिग्रेड के जो पुलिसकर्मी अपनी जान पर खेलकर मौके पर बारूद के उठते धुंए पर पानी डाल रहे थे, जो बार-बार बोल रहे थे, पटाखे हैं, सावधानी से रहो... का शोर मचा रहे थे। उनके भी आला अधिकारी इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
देश की सबसे बड़ी एजेंसी एनडीआरएफ के अधिकारियों द्वारा मीडिया के सामने पटाखों की बरामदगी। एटीएस जैसी संवेदनशील जांच एजेंसी के अधिकारियों द्वारा मौके पर पटाखों की जांच पड़ताल करना। इन सारे सबूतों के कोई मायने नहीं हैं।
मौके पर जो स्काई बम और टॉय गन के शॉट मिले हैं, उनको बिना फॉरेसिंक जांच के अधिकारी बारूद मानने को तैयार नहीं हैं। लोहियानगर पुलिस ने टॉय गन शॉट के खोखे के भीतर मिले सफेद पाउडर को आगरा और गाजियाबाद के निवाड़ी की फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा है। ये वो लैब हैं, जहां पर जांचों की लंबी वेटिंग रहती है।
इन लैब से रिपोर्ट आने में कई-कई महीने लग जाते हैं। कई बार तो इससे भी ज्यादा वक्त लग जाता है। ऐसे में पटाखा स्टोर में विस्फाेट बारूद से ही हुआ था या कोई और शक्ति थी...इसकी फॉरेंसिंक लैब से पुष्टि होने में अभी इंतजार करना ही पड़ेगा। शायद महीना, शायद दो महीना... इंतजार करते रहिए।
बिल्डिंग का मालिक संजय गुप्ता अभी तक गिरफ्तार नहीं