उन्होंने कहा कि शादियों में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, डांस, बेपरदगी ये सब हराम है। शादी के कार्ड पर सुन्नत का तरीका लिखते हैं। शादी की अदायगी करते हुए बेफिजूल खर्च कर रहे हैं। शरीयत के हिसाब से शादी होनी चाहिए। बड़ी शादी फिजूल खर्च, तीन-तीन दिन तक प्रोग्राम हो रहे हैं। मुसलमान होने के हैसियत से सबसे पहले हमारा फर्ज है शरीयत पर चलना।
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उन्होंने कहा कि सभी लोग नाराज हों, कुछ भी कहें, लेकिन शरीयत पहले है। उन्होंने मुसलमानों के वर्तमान हालात पर चिंता जाहिर करते हुए कहा मुसलमानों का कोई मुस्तकबिल नहीं है। एकता होनी जरूरी है, राजनीतिक मामले हों या कोई अन्य मसला हो।