मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में हुई मारपीट के मामले में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल बृहस्पतिवार दोपहर 2:00 बजे के बाद खत्म हो गई। निष्पक्ष जांच के आश्वासन पर जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए। लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर आने में शाम तक का समय लग गया। तब तक इमरजेंसी, वार्ड और ओपीडी में मरीजों को दिक्कत हुई। इमरजेंसी में मरीज तड़पते मिले, जबकि वार्ड में भी मरीज़ों ने बताया कि चिकित्सक देखने नहीं आए हैं। ओपीडी में भी रोजमर्रा के मुकाबले करीब 1000 पर्चे कम बने। हालांकि शाम में व्यवस्था ठीक हुई।
जूनियर डॉक्टरों की प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता से दो बार मुलाकात हुई, जिसके बाद वे संतुष्ट हो गए। प्राचार्य उनसे सुबह 9:00 बजे और दोपहर 2:00 बजे मिले। उन्हें आश्वासन दिया कि उनके साथ जांच में भेदभाव नहीं किया जाएगा। उनका पक्ष भी सुना जाएगा। एसएसपी और सीओ सिविल लाइन्स ने भी इसका आश्वासन दिया है, लिहाजा वे ड्यूटी ज्वाइन कर लें। इसके बाद जूनियर डॉक्टरों ने धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। वे प्राचार्य कार्यालय के सामने बुधवार से टेंट लगाकर धरना दे रहे थे। बुधवार को उन्हें समझाने के लिए ऊर्जा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर भी आए थे।
23 अक्तूबर को इमरजेंसी का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मारपीट हो रही थी। तीमारदारों ने आरोप लगाया था कि जूनियर डॉक्टरों ने उनके साथ मारपीट की है। पीड़ित परिवार कमालपुर का रहने वाला था और वह 5 साल के एक बच्चे का इलाज करने के लिए इमरजेंसी आया था। इस मामले में चार जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है और उन पर एससी एसटी एक्ट भी लगा हुआ है। साथ ही प्राचार्य ने तीन जूनियर डॉक्टरों को निलंबित किया हुआ है। इसी के विरोध में वे धरना दे रहे थे। उनके समर्थन में आईएमए के पदाधिकारी भी एसएसपी से मिले थे। प्राचार्य में तीन सदस्यीय समिति से भी इसकी जांच कराई है। हालांकि रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।