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सियासत के रंग निराले: ...जब बेधड़क ने चुनाव लड़ा तो हार गए थे रघुवीर शास्त्री

Fri, 15 Mar 2019 12:45 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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पृथ्वी सिंह बेधड़क और रघुवीर सिंह शास्त्री का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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भाई जैसे दोस्त लोक गायक पृथ्वी सिंह बेधड़क और रघुवीर सिंह शास्त्री साल 1962 के चुनाव में एक-दूसरे के सामने चुनाव लड़ बैठे और दोनों की लड़ाई में बाजी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मेरठ के केसी शर्मा मार गए। इसके बाद पृथ्वी सिंह बेधड़क ने कभी चुनाव नहीं लड़ा। अगले चुनाव में रघुवीर सिंह शास्त्री फिर चुनाव लड़े और जीते। 

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बागपत में शिकोहपुर गांव के रहने वाले आर्य समाज के विद्वान, लोक गायक पृथ्वी सिंह बेधड़क और ककौर कलां के आर्य समाजी विचारधारा के रघुवीर सिंह शास्त्री के बीच दोस्ती थी। दोनों परिवारों में घनिष्ठता रही। उन दिनों पृथ्वी सिंह बेधड़क की ख्याति पश्चिम यूपी के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब तक फैल चुकी थी। बेधड़क और शास्त्री के बीच आने वाले चुनाव पर चर्चा हुई तो शास्त्री ने चुनाव नहीं लड़ने की बात कही। फिर 1962 के चुनाव का एलान हो गया और पृथ्वी सिंह बेधड़क ने आजाद पार्टी से नामांकन कर दिया। बाद में रघुवीर सिंह शास्त्री ने भी बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन किया। त्रिकोणीय मुकाबले में रघुवीर सिंह शास्त्री 14600 वोट से चुनाव हार गए। 26 हजार 800 पृथ्वी सिंह बेधड़क को वोट मिली थी। पृथ्वी सिंह बेधड़क के पौत्र सहदेव सिंह बेधड़क कहते हैं कि दोनों परिवारों के बीच निकटता थी, लेकिन ऐसा संयोग बना कि दोनों ही चुनाव लड़ बैठे और दोनों ही हार गए।
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