कांग्रेस ने नगीना लोकसभा सीट से ओमवती को प्रत्याशी घोषित किया है। वह चार बार नगीना विधान सभा से विधायक और एक बार बिजनौर से सांसद रह चुकी हैं। ओमवती और उनके पति पूर्व आईएएस आरके सिंह की बिजनौर मुस्लिम और अनुसूचित जाति के बीच अच्छी खासी पकड़ है। कांग्रेस के इस दांव को बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
ओमवती पिछले करीब पांच साल से भाजपा की राजनीति कर रही थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नगीना से टिकट मांगा पर नहीं मिला। भाजपा के डाक्टर यशवंत सिंह यहां से सांसद चुने गए थे। 2017 का विधानसभा चुनाव में उन्होंने नगीना विधानसभा से भाजपा के टिकट पर लड़ा था और चुनाव हार गई।
इसके बाद वह फिर से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन भाजपा में उन्हें टिकट मिलने की उम्मीद नहीं थी। मौका देखकर उन्होंने व उनके पति आरके सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस ने फिर से नगीना सीट पर ओमवती पर दांव खेला है। ओमवती ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से ही 1985 में की थी। वे कांग्रेस के टिकट पर नगीना विधानसभा से विधायक बनीं।
इसके बाद वे सपा में चली गईं। सपा के टिकट पर 1996 नगीना से ही विधायक और 1998 में बिजनौर लोकसभा सीट से सांसद बनीं। इसके बाद वे 2002 में सपा के टिकट पर नगीना विधानसभा से फिर से विधायक बनीं। 2007 में वे बसपा में चली गईं। बसपा से नगीना सीट से फिर चुनाव जीतकर विधायक बनीं। बसपा सरकार में मंत्री रहीं। 2012 में वह बसपा के टिकट से नगीना से चुनाव हार गईं। इसके बाद मोदी लहर में उन्होंने 2013 में भाजपा का दामन थाम लिया।
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