महापंयात में दाने जएंत गे किसान
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मेरठ में मटोर के पास दिल्ली हाईवे पर शनिवार रात के साढ़े 11 बजे थे। पसीने से लथपथ एक 30 साल का युवा और एक 65 साल के बुजुर्ग साइकिल से चले जा रहे थे। उनको रोकने का इशारा किया तो कहने लगे, पंचायत में जाने के लिए देर हो जाएगी। पंचायत में जाने का कारण पूछा तो यही बोले कि अगर यह काले कानून देश में लागू रहे तो किसान खत्म हो जाएगा।
किसान पंचायत में शामिल होने का जुनून लोगों पर इस कदर है कि साइकिल से भी सैकड़ों किलोमीटर दूर किसान पंचायत में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। अंबाला के बड़ौदा गांव निवासी दरार सिंह पिछले एक साल से सिंधु बॉर्डर धरने पर हैं, वे किसान पंचायत में शामिल होने के लिए रात को साइकिल से ही मुजफ्फरनगर के लिए निकल पड़े।
उनका कहना है कि या तो सरकार इन काले कानूनों को वापस ले या हम यहीं पर शहीद हो जाएंगे। युवा किसानों का जोश इस बात से लगाया जा सकता है कि मूल रूप से कैथल के पेडल गांव निवासी जय भगवान का पूरा परिवार कैलिफोर्निया में रहता है, लेकिन किसान आंदोलन शुरू होने के बाद से वह भारत में रहकर आंदोलन में शामिल हैं। जय भगवान भी सिंधु बॉर्डर से साइकिल पर मुजफ्फरनगर रैली के लिए जा रहे थे।