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महामारी में बढ़ी महंगाई : बिगड़ा घर का बजट, कालाबाजारी पर नहीं लगाम, जीवनरक्षक दवाएं भी महंगी

Tue, 11 May 2021 11:49 AM IST
Dimple Sirohi आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ

सार

-परचून व्यापारियों ने बढ़ाए खाद्यान्न, तेल और रिफाइंड के दाम
-कालाबाजारी पर लगाम न लगने से जीवनरक्षक दवाएं भी महंगी
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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कोरोना महामारी के बीच जिंदगी बचाने के लिए जरूरी आटा, दाल, तेल जैसी जरूरी चीजों के दाम भी बेतहाशा बढ़ गए हैं। परचून व्यापारियों ने खाद्यान्न तेल और रिफाइंड के दाम बढ़ा दिए हैं। वहीं, अस्पतालों और घरों में गंभीर रूप से बीमार लोगों को बचाने के लिए जीवनरक्षक दवाएं भी कहीं गुना अधिक दाम पर बेची जा रही हैं।

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दावों के बावजूद जरूरी सामान और दवाओं की कालाबाजारी पर लगाम नहीं लग पाई है। दवा की दुकानों पर काफी दवाएं और उपकरण तो उपलब्ध भी नहीं हैं।  जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारी इस हालात पर खामोश हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग एवं औषधि प्रशासन सहित अन्य विभागीय अधिकारियों के द्वारा बीते एक माह में जांच और छापामारी संबंधित कोई कार्यवाही नहीं की गई। दुकानों पर ग्राहक मनमानी कीमतें देने को मजबूर हैं। 
 
मंडी से मोहल्ले तक महंगाई की मार 
कोरोना महामारी में मंडी से पॉश कालोनियों और मोहल्लों की खुली दुकानों में भी जरूरी सामान मनमाने रेट पर बेचा जा रहा है। बीते 15 दिन में ही सभी दालें, मसाले, सोयाबीन तेल, घी आदि के दाम तेजी से बढ़े हैं। नवीन मंडी के व्यापारी नवीन गुप्ता का कहना है कि दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों में खाद्यान्न की आपूर्ति छह से सात दिन में हो रही है। बड़ी संख्या में व्यापारी बीमार हैं तो कुछ की कोरोना से मौत हो चुकी है।
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खाद्यान्न                      15 दिन पूर्व           वर्तमान

रिफाइंड                              130                      160
सरसों का तेल कोल्हू                160                      190
सरसों का तेल दुकान                135                      160
सरसों का तेल कच्छी धानी         168                       180
आटा (10 किलो)                 250                       280
दाल चना                               75                       100
मलका मसूर                            95                       110
अरहर की दाल                       100                       140

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नहीं रुकी चिकित्सा उपकरणों की कालाबाजारी
बाजारों में कोविड में प्रयोग होने वाले उपकरण ऑक्सीमीटर, स्टीमर, थर्मामीटर, नेबुलाइजर, ग्लोकोमीटर, बीपी मशीन का स्टॉक मार्केट में शॉर्ट हो गया है। व्यापारी इन उपकरणों के प्रिंट से भी ऊपर दामों में बेच रहे हैं। कोविड में प्रयोग होने वाली दवाएं और इंजेक्शन भी आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं।

दवाओं और उपकरणों की कालाबाजारी की लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। शहर में किसी भी मेडिकल स्टोर पर आसानी से उपलब्ध होने वाले थर्मामीटर के लिए भी लोगों एक से दूसरी दुकान पर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। 18 रुपये वाला इलेक्ट्राल का पैकेट भी 100 रुपये तक दिया जा रहा है। कुछ दुकानों में यह उपलब्ध भी नहीं है। मरीज और तीमारदार दुकानों पर भटक रहे हैं।
 
उपकरण                    मार्च 2021                            मई 2021
ऑक्सीमीटर                1175                                    4000
स्टीमर                        250                                     1200
थर्मामीटर                    100                                      500
नेबुलाइजर                  1500                                    5000
ग्लूकोमीटर                  480                                      2000
बीपी मशीन                 1000                                    5000
 
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं
फूलबाग कॉलानी निवासी राजरानी शर्मा ने सीएमओ को ज्ञापन सौंपा। पीड़िता ने बताया कि कचहरी रोड स्थित एक अस्पताल में ऑक्सीजन केन 3500 रुपये में दी गई। इस पर प्रिंट मूल्य 499 है। जरूरत में उन्हें दो केन खरीदनी पड़ी। इसके लिए उन्होंने सात हजार रुपये दिए। खंदक व्यापारी अंकुर गोयल ने बताया कि सभी कोविड उपकरणों का स्टॉक कर लिया गया है। जरूरतमंद लोगों को पांच गुना दाम में यह वस्तु बेची जा रही हैं।
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