प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव जहां आज से ‘विकास से विजय की ओर रथ यात्रा’ लेकर मिशन 2017 को फतह करने निकल रहे हैं, वहीं गन्ना किसान बकाया भुगतान नहीं होने और अब तक गन्ने का रेट घोषित नहीं होने से सरकार से खफा है। बढ़ती महंगाई से गन्ना उत्पादन लागत ही गन्ना मूल्य से अधिक हो गई है। किसानों ने वर्तमान पेराई सत्र के लिए 400 रुपये प्रति कुंतल की मांग की है।
गन्ना रेट घोषित करने से पहले राज्य सरकार गन्ना किसानों के अलावा गन्ना एवं शोध संस्थानों से गन्ना उत्पादन लागत रिपोर्ट प्राप्त करती है। साथ ही शुगर इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की जाती है। इसके बाद गन्ना मूल्य निर्धारण कमेटी गन्ना रेट तय करके सीएम के पास भेजती है। सीएम कैबिनेट से विचार विमर्श करके गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य यानि एसएपी घोषित करते हैं। वर्तमान पेराई सत्र 2016-17 की गन्ना मूल्य निर्धारण कमेटी की बैठक हो चुकी है। किसानों ने कमेटी के सामने अपना पक्ष रख दिया है। सौंपी गई रिपोर्ट में गन्ना उत्पादन लागत वर्तमान गन्ना एसएपी से अधिक आ रही है। किसान को वर्तमान गन्ना एसएपी से घाटा उठाना पड़ रहा है।
ये है गन्ना उत्पादन लागत का गणित
जनपद के कृषि मामलों के जानकार किसान बिजेंद्र प्रधान धनपुरा ने अमर उजाला को एक बीघा गन्ना उत्पादन में आ रही लागत का गणित मुहैया कराया। उनके अनुसार एक बीघा गन्ना उत्पादन लागत 14800 रुपये है, जबकि गन्ना एसएपी 280 रुपये प्रति कुंतल से किसान की आमदनी 14 हजार रुपये आ रही है। किसान का प्रति बीघा 800 रुपये का घाटा हो रहा है।
400 रुपये मिले रेट तो मिले राहत
गन्ना उत्पादन लागत बढ़ने से बेहाल किसानों ने वर्तमान पेराई सत्र 2016-17 के लिए गन्ने का एसएपी कम से कम 400 रुपये प्रति कुंतल की मांग की है। किसानों का कहना है कि चीनी के दाम भी बढ़े हुए हैं और चीनी का परता भी लगातार बढ़ रहा है।
मद कुल लागत
बीज 5 कुंतल 1500
खाद, डीएपी, पोटाश 770
जमीन का किराया 5000
जुताई 7 बार 700
देशी खाद, दवाई, यूरिया 2120
निराई-गुड़ाई, बंधाई 1610
पानी 600
बुवाई 500
गन्ना छिलाई एवं ढुलाई 2000
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कुल लागत 14800 रुपये प्रति बीघा
एक बीघा जमीन से औसतन 50 कुंतल गन्ना उत्पादन होता है। 280 रुपये प्रति कुंतल रेट से गन्ने की कीमत 14 हजार रुपये प्रति बीघा है।