हस्तिनापुर के खादर में घुसा गंगा का पानी
हस्तिनापुर। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में दो दिनों से हो रही बारिश के कारण मंगलवार को अचानक गंगा उफान पर पहुंच गई। तटबंध टूटने से खादर क्षेत्र के कई गांवों में पानी भर गया। स्थिति का जायजा लेने के लिए डीएम समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने तहसील प्रशासन को हालात पर निगरानी रखने के निर्देश दिए।
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर एक लाख 92 हजार क्यूसेक रहा। जबकि हरिद्वार से गंगा का जलस्तर दो लाख 92 हजार क्यूसेक है। देररात जलस्तर 3.67 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। ऐसे में बाढ़ के हालातों से निपटने के लिए तहसील प्रशासन को अलर्ट किया गया है। राजस्व टीम को क्षेत्र की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जा रही है।
मंगलवार को डीएम के बालाजी ने एडीएम प्रशासन और एसडीएम कमलेश गोयल के साथ स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने दबखेड़ी, रठौरा कला, हशापुर परसापुर, शेरपुर नई बस्ती, हरिपुर, फतेहपुर प्रेम आदि कई गांव का निरीक्षण किया। ग्रामीणों को मदद का आश्वासन दिया। फतेहपुर प्रेम में तटबंध निरीक्षण के दौरान डीएम के. बालाजी ने कहा कि बाढ़ जैसे हालातों से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है। हरिद्वार से लगातार पानी बढ़ने का अपडेट मिल रहा है। निचले इलाकों के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा गया है।
सिंचाई विभाग पर उठाए सवाल
डीएम के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाए। कहा कि बीते दो माह से कटान के कारण तटबंध क्षतिग्रस्त पड़ा है। गंगा किसानों के खेतों में बह रही है। इसके बाद भी सिंचाई विभाग ने कटान रोकने का प्रयास नहीं किया। इस पर डीएम ने समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया।
किसानों ने काटी अधपकी फसल
खादर क्षेत्र में बाढ़ की सूचना मिलते ही किसानों ने अधपकी धान की फसलों को काटना शुरू कर दिया। किसान आगे-आगे कंबाइन मशीनों से धान कटाई में जुटे रहे तो पीछे से पानी उनके खेतों में भरता गया। ऐसे में काफी फसल बर्बाद हो गई। कुछ किसानों की कटी फसल गंगा में बह गई।
ग्रामीणों ने नहीं छोड़े घर
क्षेत्र के हरिपुर, दबखेड़ी, रठौरा कला, किशनपुर, हादीपुर गांवडी, भीमकुंड गांवों के कई घरों में बाढ़ का पानी भर गया। प्रशासन स्तर से लोगों की मदद का प्रयास किया गया। लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई। इसके बाद भी ग्रामीण घर छोड़ने को तैयार नहीं थे।
गंगा का रौद्र रूप देख सहमे लोग
शेरपुर नई बस्ती के पास करीब पांच सौ मीटर क्षेत्र में टूटे तटबंध ने अधिकारियों की नींदें उड़ा रखी हैं। गंगा का रौद्र रूप देखकर ग्रामीण भी डरे हुए हैं। कई गांवों के संपर्क मार्ग कट चुके हैं या जलमग्न हैं। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
पहले चेत जाते तो नहीं आती बाढ़
अमर उजाला ने खादर क्षेत्र में टूटे तटबंध को बंद करने के लिए लगातार खबर प्रकाशित की। इसके बाद भी प्रशासन के किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा खादर क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
मंत्री जी खादर को बाढ़ से बचाइए
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए क्षेत्रीय विधायक दिनेश खटीक के प्रयास से कटाव निरोधक तटबंध का निर्माण कराया गया। फतेहपुर प्रेम गांव से शेरपुर नई बस्ती तक 18 करोड़ रुपये से करीब 900 मीटर और 870 मीटर के तटबंध का निर्माण हुआ। इसके बावजूद गंगा में 19 मई और 19 अक्तूबर को आए उफान से शासन प्रशासन के बाढ़ रोकने के दावे फेल हो गए। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुजफ्फरनगर सीमा से भीमकुंड पुल तक लगभग 12 किलोमीटर तक तटबंध निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसको लेकर मंगलवार को लखनऊ में बैठक भी हुई।
इन गांव के हालात नाजुक
हसापुर परसापुर, शेरपुर नई बस्ती, रठौरा कला, हादीपुर गांवड़ी, शेरपुर, हरिपुर, पटेलनगर, सिरजोपुर, कुंहेडा, जलालपुर जोरा।
23 साल बाद देखी अक्तूबर में बाढ़
हस्तिनापुर। तारापुर निवासी 90 वर्षीय जगबीर सिंह ने बताया कि 23 साल बाद एक बार फिर अक्तूबर माह में बाढ़ का मंजर सामने आया है। इससे पहले 1998 में दीपावली के आसपास ही बाढ़ ने तबाही मचाई थी। उन्होंने कहा कि अब तक बारिश से डर लगने लगा है। हर बार बारिश उनकी तबाही की गाथा लिखती है। कुछ माह पहले 19 मई को भी खादर क्षेत्र में गंगा उफान पर थी। तटबंध टूटने से बड़े पैमाने पर किसानों की नष्ट हुई थी।