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उत्साह के साथ होगा लाल बाग के राजा का स्वागत

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पूरे उत्साह से होगा लाल बाग के राजा का स्वागत
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मेरठ। शहर में गणेश चतुर्थी की तैयारी शुरू हो गई है। 10 सितंबर से उत्सव आरंभ होगा। इस बार दोगुने उत्साह के साथ यह पर्व मनेगा और लाल बाग के राजा का भव्य स्वागत किया जाएगा। हर घर में गणपति बप्पा विराजमान होंगे। मूर्तिकारों के यहां प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
शहर में 30 से अधिक स्थानों पर गणेश उत्सव का आयोजन होेगा। गणेश पंडाल लगाने की तैयारी पूरी हो गई है। घरों में जहां दो से छह फीट तक के गणेश जी स्थापित किए जाएंगे। वही, पंडालों में पांच से 16 फीट तक के गजानन विराजमान होंगे। मूर्तिकारों के यहां पूरा परिवार मूर्ति बनाने और उसे अंतिम रूप देने में लगा है।
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थापर नगर मूर्ति कला केंद्र संचालक विनोद ने बताया कि इस बार बड़ी संख्या में लोगों ने एडवांस आर्डर पर मूर्ति बनवाई हैं। ज्यादातर मूर्तियां मिट्टी से बनी हैं। इनमें इको फ्रेंडली रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। शहर के तीन प्रमुख गणेश मंदिरों में विशेष आयोजन कराए जाएंगे।
वर्ष 2020 में कोविड-19 चलते सामूहिक आयोजनों पर प्रतिबंध रहा। गणेश पूजा कार्यक्रम घरों तक ही सीमित रहे। इस बार सूरजकुंड, नेहरू नगर, प्रह्लाद नगर, जागृति विहार, कंकरखेड़ा, ब्रह्मपुरी और पुराने शहर में बड़ी संख्या में लोग गणेश पूजा की तैयारी में जुटे हैं। इसके चलते हर आकार की मूर्ति की मांग है।
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10 से 18 सितंबर तक चलेगा उत्सव
- गणेश स्थापना 10 सितंबर को होगी। उत्सव 18 सितंबर तक चलेगा और 19 सितंबर को गणपति विसर्जन होगा। शहर के मुख्य चौराहों से गुजरने वाले लोग प्रतिदिन भगवान गणेश के दर्शन प्राप्त कर पाएंगे। सैकड़ों की संख्या में लोग सुबह शाम आरती में शामिल होंगे। कुछ लोग पांच दिन तो कुछ सात दिन के लिए घर में भगवान गणेश को विराजमान करते हैं। परंपरा अनुसार 10 दिन तक आरती और पूजन किया जाता है। इस बार ग्रह नक्षत्रों के अनुसार आठ दिन का आयोजन होगा।
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ज्ञान निर्वाण प्रदान करते हैं श्री गणेश
मेरठ। सनातन धर्म के पंच देवों श्रीहरि, शिव, सूर्य, दुर्गा के पहले बुद्धि, ज्ञान और विवेक के प्रतीक श्रीगणेश को स्थान दिया गया है। सनातन धर्म के सभी मंदिरों में श्री गणेश पहले स्थान पर विराजमान हैं। गणेश जी से विवेक लो, ब्रह्म ज्ञान लो, तभी श्रीहरि, शिव, सूर्य और दुर्गा को समझ सकेंगे। विद्वानों ने कहा भी है, ग अक्षर ज्ञान का और ण अक्षर निर्वाण का वाचक है। इस पर्व में गणपति बप्पा की विशेष पूजा होती है। अगर आप शुभ मुहूर्त में ही गणपति की स्थापना करेंगे तो ये आपके लिए काफी फलदायी होगा।
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गणपति पूजन के लिए शुभ मुहूर्त
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:17 से लेकर रात 10 बजे तक रहेगा। ऐसे में 10 सितंबर को 12 बजे के बाद कभी भी गणपति की स्थापना और पूजा आदि कर सकते हैं। श्रीगणेश का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न समय में हुआ था। उस समय सोमवार का दिन, स्वाति नक्षत्र, सिंह लग्न और अभिजित मुहूर्त था। श्री गणेशजी के जन्म के समय सभी शुभ ग्रह कुंडली में पंचग्रही योग बनाए हुए थे। गणेश जी को मोदक (लड्डू), दूर्वा घास तथा लाल रंग के पुष्प अति प्रिय है।
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- रुके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए
- गणेश जी की मूर्ति के आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस लाकर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए जय गणेश, काटो क्लेश का जाप करें।
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