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एक साल में 280 रुपये महंगा हो गया घरेलू गैस सिलेंडर

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एक साल में 280 रुपये बढ़े एलपीजी सिलिंडर के दाम
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- 12 महीने में 11 बार बढ़े दाम, रसोई से लेकर पूरे घर का बिगड़ने लगा है बजट, एलपीजी सिलिंडर की मांग भी घटी
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। घरेलू गैस पर बढ़ती महंगाई ने जनता की कमर तोड़कर रख दी है। एक साल में रसोई गैस सिलिंडर पर 280 रुपये दाम बढ़े हैं। इससे महिलाओं की रसोई से लेकर पूरे घर का बजट बिगड़ गया है। एलपीजी सिलिंडर के मांग में भी कमी आ रही है।
देहात में तो गैस चूल्हे के स्थान पर पुराने धुएं वाले मिट्टी के चूल्हे भी जलने शुरू हो गए हैं। इसके चलते सरकार की धुआं मुक्त रसोई की योजना पर भी संकट के बादल मंडरा गए हैं। शहर में अधिकांश घरों ने इंडक्शन चूल्हे का प्रयोग शुरू कर दिया है। सितंबर 2020 से सितंबर 2021 तक एक साल में 11 बार रसोई के दाम बढ़े हैं।
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पहले मुफ्त में मिले सिलिंडर, अब गैस खरीदने के पैसे नहीं
सरकार ने भले ही गरीबों को उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में रसोई गैस सिलिंडर बांट दिए हों, लेकिन गरीब के पास अब गैस खरीदने को पैसा नहीं है। शहर में गैस के स्थान पर इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
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- एक नजर में घरेलू गैस की कीमतें (रुपये में)
- सितंबर 2020 592.5
- दो दिसंबर से 14 दिसंबर तक 642.5
- 15 दिसंबर से 03 फरवरी 2021 तक 692.5
- चार फरवरी से 14 फरवरी 2021 तक 717.5
- 15 फरवरी से 24 फरवरी तक 767.5
- 25 फरवरी से 28 फरवरी तक 792.5
- मार्च माह में 817.5
- अप्रैल से जून तक 807.5
- एक से 16 अगस्त तक 833
- 17 से 31 अगस्त तक 858
- एक सितंबर से 883
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पहले से कम हो गई आपूर्ति
रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति पहले से कम हुई है। हो सकता है लोग रेट कम होने का इंतजार कर रहे हों या अन्य कारण हो। देहात से जुड़े उपभोक्ता पारंपरिक विकल्प भी चुन सकते हैं। गांवों में महिलाएं मिट्टी का चूल्हा भी प्रयोग करती हैं। इसलिए रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति कम हुई है। - मानव टंडन, मालिक, रामपूर्णा गैस एजेंसी।
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पिछले साल अगस्त में थी अधिक आपूर्ति
पिछले साल अगस्त माह में रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति अधिक थी। तब एजेंसी से 9200 सिलिंडरों की आपूर्ति की गई थी। इस बार अगस्त माह में 8400 सिलिंडरों की आपूर्ति एजेंसी से की गई है।
- निजामुद्दीन, मैनेजर, रंजना गैस एजेंसी, खरखौदा
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गैस की बढ़ती कीमत ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। गैस रसोई की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार को गैस सस्ता करने पर विचार करना चाहिए। मजबूरी में पुराने संसाधनों की तरफ लौटना पड़ रहा है।
-वर्षा सैनी, शिक्षिका, नेहरू नगर।
एक साल में 280 रुपये गैस सिलिंडर पर बढ़ गए हैं। एक तरफ रेट बढ़ रहे हैं वही दूसरी तरफ घटतौली। ऐसी स्थिति में रसोई चलाना भारी पड़ रहा है। घर चलाने के लिए लकड़ी के चूल्हे जलाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
-राधा, गृहणी, न्यू प्रभात नगर।
एक तरफ कोरोना की मार, वहीं दूसरी तरफ गैस सिलिंडर पर बढ़ती महंगाई ने कमर तोड़ दी है। सरकार को रसोई गैस सस्ती करनी चाहिए। वरना वह दिन दूर नहीं जब महिलाओं को घर चलाने के लिए धुएं वाले चूल्हों की तरफ लौटना पड़ेगा।
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शालू, गृहणी, ईशापुरम।
महंगाई के दौर में रसोई चलानी भारी पड़ रही है। देहात में ही नहीं बल्कि शहर में भी काफी परिवार पुराने धुएं वाले चूल्हे जलाने को मजबूर हैं। सरकार की धुआं मुक्त वातवारण की योजना को पलीता लग रहा है।
साजिदा, गृहणी, रामबाग कालोनी।
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