मेरठ में माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश गोला प्रजापति ने प्रजापति समाज को विकास भवन सभागार में संबोधित करते हुए कहा कि हमे अपने ट्रेंड को बदलना होगा। मटके से आगे निकलते हुए मिट्टी से घर के सजावट की वस्तुएं बनानी होगी। इससे मिट्टी भी कम लगेगी और आपकी आमदनी अधिक होगी।
अध्यक्ष ने लखनऊ में लगी प्रदर्शनी का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक मटका 100 रुपये में बिका। वहीं, मिट्टी से बनाई चार चिड़िया एक हैंगर पर टांगी हुई थी वह चार सौ रुपये में बिकी। इससे साफ है कि अपने को बदलाव लाना होगा। वहीं, अध्यक्ष ने कहा कि दीवाली पर अपने मिट्टी के दीपक में मोम रखकर बेचें। इससे काफी बदलाव आएगा।
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उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन और प्रजापति समाज के बीच तालमेल नही रहेगा तो कोई लाभ नही मिलेगा। मोहनजोदड़ो सभ्यता में मिट्टी के बर्तन प्राप्त हुए। इसलिए आप शिल्पकार हैं। आपकी पहचान सालों पुरानी है। लेकिन आपको अधिकारियों से मिलकर सहयोग लेना होगा। वहीं, मिट्टी के पट्टे के लिए दस साल बाद नवीनीकरण कराना होता है। इसलिए सभी कार्य नियम के अनुसार करें। जिससे आपको कोई दिक्कत भी झेलनी न पड़े।
मिट्टी के बर्तन बीमारी से बचा रहे
मिट्टी के बर्तन के पीछे अब लोग भाग रहे है। इससे कैंसर आदि बीमारियों से बचा जा सकता है। प्लास्टिक के बर्तन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। चाय का आनंद कुल्हड़ में ही आता है। यह हानिकारक भी नहीं है।
फैशन डिजाइनर्स से करें संपर्क
हमें अपने उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए नए-नए आइडिया लाने होंगे। फैशन डिजाइनर्स से भी जुड़ सकते हैं। उनके लिए मिट्टी के कुछ उत्पाद बनाकर दे सकते हैं। वहीं, हम रोडवेज और रेलवे में भी कुल्हड़ बेचने के लिए संपर्क कर सकते है।