सावधान! बाजारों में दो हजार, पांच सौ, दो सौ और 100 के नकली चल रहे हैं। अगर चूक हुई तो आप नकली नोट ले बैठेंगे। इसलिए ऐसे नोट को लेने पहले तसल्ली जरूर कर लें।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नकली नोट छापने का काम पिछले दो साल से कर रहे हैं। जिसका साइज, कलर और कागज असली नोट जैसा है। पुलिस का दावा है कि गिरोह का सरगना प्रशांत तीन बार नकली नोट छापने के मामले में जेल जा चुका है। इसके बाद भी प्रशांत ने नकली नोट छापने बंद नहीं किए।
आरोपियों ने बताया कि एक रात में पांच लाख से भी ज्यादा नकली नोट को तीन-चार लोग तैयार कर देते थे। पुलिस को अंदेशा है कि लाखों रुपयों से ज्यादा नकली नोट आरोपी बाजारों में सप्लाई कर चुके हैं। पुलिस ने नकली नोट की जानकारी बैंक मैनेजरों को दी है, बैंकों द्वारा नकली नोट से सावधान रहने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
यह भी पढ़ें: शामलीः पुलिस हिरासत में लिए गए युवक ने धारदार हथियार से खुद का गला रेता
मां-बेटी चलाती थी दुकानों में नकली नोट
पुलिस ने बताया कि नकली नोट छापने वालों का नेटवर्क दूर तक फैला हुआ है। पकड़ी गई मां-बेटी बाजारों में दुकानों पर नकली नोट को चला देती थी। बताया कि सिखेड़ा गांव की कई महिलाएं गैंग से जुड़ी हुई थी। सरगना प्रशांत के साथ विनोद फरार हैं, जोकि सिखेड़ा गांव इंचौली का निवासी है। विनोद की पत्नी नकली नोट को सप्लाई करने का काम को करती है।
जेल में हुई मुलाकात, फिर शुरू किया काम
एसपी देहात ने बताया कि दो साल पहले आरोपी प्रशांत गाजियाबाद पुलिस ने जेल भेजा था। वहीं पर उसकी मुलाकात सिकंदर नाम के युवक से हुई थी। सिकंदर का रिश्तेदार विनोद है, जोकि सिखेड़ा गांव का निवासी है।
जेल से बाहर आने के बाद ही प्रशांत ने सिकंदर से मुलाकात की और फिर विनोद के साथ गंगा नगर इलाके में नकली नोट बनाने का काम शुरू कर दिया। पुलिस ने बताया कि जेल में जाने से पहले प्रशांत मेरठ बुलंदशहर हापुड़ दिल्ली समेत कई जगह पर 5 लाख रुपये से ज्यादा नकली नोट बाजार में चला चुका था।