ट्रांसफार्मर मरम्मत करते समय वर्कशाप कर्मियों ने देखा कि नीचे के तार पर इंसुलेशन पेंट नहीं था और तार भी घटिया क्वालिटी का था। वर्कशाप कर्मियों ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने मामले की जानकारी कंपनी एमडी को दी।एमडी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने जांच बैठा दी है। आपूर्ति किए गए तार की कीमत करीब सवा करोड़ रुपये है।
खराब तार लगने से फुंक जाते 25 केवी के 1727 ट्रांसफार्मर
अधिकारियों के मुताबिक 25 केवी ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए 22 किलोग्राम तार की आवश्यकता होती है। अगर ये घटिया तार लगाकर ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कर दी जाती तो 1727 ट्रांसफार्मर लोड पड़ने से पहले ही दम तोड़ देते। 63 केवी के 1085, 100 केवी के 844 और 250 केवी के 506 ट्रांसफार्मर फुंक जाते और इससे विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान होता।
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इक्वेटर अनुभाग ने दी खराब तार को ओके रिपोर्ट
वर्कशाप में सामग्री की आपूर्ति का काम मेटेरियल मैनेजमेंट अनुभाग देखता है। यहीं से सामग्री का टेंडर आदि होता है। इसके बाद सामग्री की जांच इक्वेटर सेक्शन के अधिकारियों की कमेटी करती है। इस कमेटी ने घटिया तार को ओके की रिपोर्ट दे दी। इसके बाद फर्म ने घटिया तार की खेप वर्कशाप तक पहुंचा दी।
क्या बोले अधिकारी
वर्कशॉप में घटिया ट्रांसफार्मर एल्यूमीनियम तार आपूर्ति का मामला पकड़ा गया है। इस पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ