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Meerut News: नेताओं की ये अदावत दे रही बड़े सियासी नुकसान को दावत

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- दूर नहीं हुई आपसी कलह तो विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा खामियाजा
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- चुनावी जंगजुओं की लड़ाई सड़क पर आई, पार्टी हाईकमान भी गंभीर नहीं

सैयद यासिर रज़ा
मेरठ।
सियासत के चेहरे पे रौनक नहीं,
ये औरत हमेशा की बीमार है।।
नामचीन शायर शकील जमाली का ये शेर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी मंजर की नुमाइंदगी करता नजर आ रहा है। मतलब कि चुनाव बीत गए हैं। सरकार ने अपना काम करना शुरू कर दिया है, लेकिन नेताओं की आपसी अदावत में पश्चिम की सियासत बेरौनक हो गई है। दरअसल, लोकसभा चुनाव में हार के बाद प्रमुख राजनैतिक दलों के नेताओं के बीच रार छिड़ी हुई है। भाजपा, सपा और बसपा में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। भाजपा में संगीत सोम और संजीव बालियान आमने सामने हैं तो समाजवादी पार्टी में मेरठ से प्रत्याशी सुनीता वर्मा के पति योगेश वर्मा और सरधना से समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान के बीच तल्खी भी सामने आ गई। बसपा प्रत्याशी भी अपने साथियों से खफा हैं। कुल मिलाकर इस लोकसभा चुनाव ने कई नेताओं की आपसी और अंदरूनी लड़ाई को बीच चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।
मुजफ्फरनगर सीट पर हार के बाद भारतीय जनता पार्टी में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व विधायक संगीत सोम के बीच की लड़ाई सार्वजनिक हो चुकी है। दोनों एक दूसरे पर जमकर हमला कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी ये बात देखने को मिली थी, जिसका खामियाजा संजीव बालियान को उठाना पड़ा। चुनाव के बाद दोनों के बीच का विवाद खुलकर सामने आ गया और दोनों नेता एक दूसरे पर कीचड़ उछालने लगे। खास बात यह है कि इस विवाद को खत्म करने की कोशिश अभी तक किसी ने नहीं की है और न ही किसी ने मध्यस्थता कराने का प्रयास किया है। इस लड़ाई का अंजाम क्या होता है, यह तो आने वाले समय में पता चलेगा। ऐसा नहीं है कि इस सीट पर सिर्फ भाजपा में ही आपसी घमासान मचा है, यहां समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल करने वाले हरेंद्र मलिक और मेरठ के एक प्रभावशाली विधायक के बीच भी तल्खी देखने को मिल रही है। हरेंद्र मलिक का कहना है कि हमारी पार्टी के नेताओं ने अगर भितरघात न किया होता तो हमारा जीत का मार्जिन एक लाख से ऊपर का होता। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कम से कम सरधना में संगीत सोम की नाराजगी का जितना नफा हुआ था, उसे पार्टी के कुछ नेताओं की भितरघात ने सफा कर दिया। सरधना से समाजवादी पार्टी को संजीव बालियान के मुकाबले 45 वोट कम मिले थे।
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मेरठ में सपा में भितरघात का लगा आरोप
मेरठ में समाजवादी पार्टी की हार मात्र 10535 वोटाें से हुई। समाजवादी पार्टी के योगेश वर्मा की पत्नी सुनीता वर्मा को यहां से हार का सामना करना पड़ा। योगेश वर्मा का कहना था कि वह नाम लेकर किसी का कद नहीं बढ़ाना चाहते, लेकिन सब जानते हैं कि इस चुनाव में किसने साथ दिया और किसने साथ नहीं दिया। एक खास बिरादरी का वोट उन्हें नहीं मिला। दरअसल, यहां से पहले समाजवादी पार्टी ने भानु प्रताप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। कहा गया कि भानु प्रताप सिंह का चुनाव उठ नहीं पा रहा है तो उनका टिकट काटकर अतुल प्रधान को टिकट दे दिया गया। इसी दौरान दलितों में विरोध शुरू हो गया कि अगर दलित का टिकट कटा है तो दलित को ही टिकट मिलना चाहिए। नामांकन के बिल्कुल अंतिम समय में समाजवादी पार्टी ने योगेश वर्मा की पत्नी सुनीता वर्मा को अपना प्रत्याशी बना दिया। इसे लेकर अतुल प्रधान ने नाराजगी जाहिर की। कहा जा रहा है कि गुर्जर समाज का जितना वोट समाजवादी पार्टी को मिलना चाहिए थे, वह नहीं मिला। इसी तरह हापुड़ के सपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने किठौर से विधायक शाहिद मंजूर पर सुनीता वर्मा की हार का ठीकरा फोड़ा। हालांकि सपा उम्मीदवार सुनीता वर्मा और उनके पति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
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मेरठ में सबसे बुरा हाल बहुजन समाज पार्टी का हुआ। 2019 के चुनाव में 5 लाख 81 हजार वोट पाने वाली पार्टी इस चुनाव में 87 हजार वोटों पर सिमट गई। बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी ने पार्टी से अपेक्षित सहयोग न मिलने का आरोप लगाया। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के नेता अपना बूथ तक नहीं जितवा सके। इसमें याकूब कुरैशी और मुनकाद अली दोनों के बूथ पर बसपा बुरी तरह से हार गई। कुल मिलाकर इस लड़ाई को संबंधित राजनैतिक दल ने समय रहते शांत नहीं किया तो आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में कम से मेरठ और उसके आसपास की सीटों पर प्रभाव जरूर पड़ेगा।
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