जिला पंचायत सदस्य के रूप में राजनीति का ककहरा सीखने वाली सुनीता वर्मा को जनता ने महानगर की प्रथम नागरिक चुना। महापौर सुनीता वर्मा अमर उजाला कार्यालय में आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में जनता से रूबरू हुईं। शहर से आए गणमान्य लोगों ने सवाल किए। जिनके जवाब में उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर कीमत पर शहर का विकास करेंगी। कहा कि उनका लक्ष्य है कि शहर का सर्वांगीण विकास हो।
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संवाद में शहर के विभिन्न वर्गों से आए गण्यमान्य लोग मौजूद रहे। प्रमुख चिकित्सक, शिक्षक, बिल्डर, समाजसेवी आदि सभी ने महापौर से सवाल किए। चर्चा में सामने आया कि महानगर में समस्याओं का अंबार है। नगर निगम के पास कूड़ा निस्तारण का ठोस प्लान नहीं है। स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं। डिवाइडर हैं परंतु अनाधिकृत कट जाम का सबब बने हैं। अतिक्रमण नासूर बनता जा रहा है। सभी सवालों के जवाब में महापौर सुनीता वर्मा ने अपना एजेंडा साफ किया। कहा कि हमने काम शुरू कर दिया है। नालों के निरीक्षण से लेकर शहर के गड्ढों तक का चिह्निकरण शुरू हो गया है। सभी पर काम होगा। नगर निगम में कमीशनखोरी बंद की जाएगी। सभी के सहयोग से शहर का विकास करेंगे। जनता पर बोझ डाले बिना नगर निगम की आय बढ़ाएंगे। जनता की ओर से भी सुझाव आए। समस्याओं से लेकर समाधान तक पर मंथन हुआ और नतीजा एक ही निकला। समस्याओं से जूझ रहे महानगर को विकास की डगर पर ले जाने केलिए काम हो।
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सवाल: 24 घंटे में से कितना समय नगर निगम के कामों को देंगी।
जवाब: कम से कम 18 घंटे।
सवाल: योजनाएं और नीतियां तैयार करने में कितने प्रतिशत मदद अपने पति योगेश वर्मा की लेंगी।
जवाब: 50 प्रतिशत।
सवाल: नगर निगम में कमीशनखोरी है। इसे कितने प्रतिशत कम करेंगी।
जवाब: शत-प्रतिशत।
सवाल: प्राथमिकता परिवार या शहर का विकास।
जवाब: शहर का विकास। शहर की जनता सुखी तो परिवार भी सुखी।
सवाल: सदन में काफी सदस्य विपक्ष में बैठेंगे, कैसे मैनेज होगा।
जवाब: सभी को साथ लेकर विकास करेंगे। फिर 2019 का चुनाव भी है। जो शहर के विकास में सहयोग नहीं करेगा, जनता उसे माफ नहीं करेगी।
सवाल: क्या अपने बच्चों को राजनीति में आने केलिए प्रेरित करेंगी।
जवाब: यदि बच्चे समाज सेवा करना चाहते हैं तो राजनीति इसकेलिए बेहतर विकल्प है।
सवाल: जीत का श्रेय किसे देना चाहेंगी पति को या पार्टी को।
जवाब: पार्टी को।
सवाल: यदि एक वार्ड को आदर्श बनाना चाहें तो किसे बनाएंगी।
जवाब: सभी वार्डों को आदर्श बनाने का लक्ष्य है।
सवाल: सर्किल रेट के आधार पर क्या हाउस टैक्स लगाने की व्यवस्था करेंगे।
जवाब: निगम की आय तो बढ़ाएंगे पर जनता पर बोझ नहीं डाला जाएगा।
सवाल: आप बसपा से हैं। केन्द्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है? कैसे समन्वय बनाएंगी
जवाब: अभी तक तो समन्वय ठीक ही है। बाकी आगे देखा जाएगा
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जनता के सवाल और जवाब
मेयर से सवाल करतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
सवाल: शहर में स्वच्छता मित्र बनाए गए हैं। शिक्षकों की तरह से उनका लेसन प्लान बने ताकि यह पता हो कि वह कहां काम करेंगे। शहर भर में कूड़ा डाला जा रहा है? इसका समाधान कैसे होगा।- अनुभूति चौहान, अध्यक्ष अरुणोदय संस्था
सुनीता: स्वच्छता मित्रों को प्लान बनाकर ही काम पर लगाएंगे। निश्चित रूप से कूड़ा निस्तारण शहर की बड़ी समस्या है। इस पर फोकस है। कूड़ा निस्तारण की कई भावी योजनाओं का मैं अध्ययन कर रही हूं। जो बेहतर होगा उस पर काम जरूर होगा।
सवाल: शहर में सड़कें चौड़ी हैं परंतु अतिक्रमण की वजह से संकरी हो गई हैं। शहर के तमाम लोग सफाई की दिशा में काम कर रहे हैं परंतु सरकारी सहयोग कम है। यह कैसे संभव होगा कि लोगों का रोजगार भी न छिने और शहर अतिक्रमण मुक्त भी हो जाए। दूसरा, गंदगी की वजह से बीमारी बढ़ती जा रही हैं। इसका कैसे समाधान हो जबकि सफाई, फॉगिंग आदि की जिम्मेदारी नगर निगम की है?-डॉ. वीरोत्तम तोमर, पूर्व अध्यक्ष आईएमए एवं छाती रोग विशेषज्ञ
सुनीता: हम उन सड़कों का चिह्निकरण कर रहे हैं जिन पर सबसे ज्यादा अतिक्रमण है। लोगों से बातचीत करेंगे। कोशिश यह रहेगी कि अस्थायी कब्जेदारों को कहीं शिफ्ट किया जाए। सफाई पर मैं कहूंगी कि मैंने आज ही एक नाले का निरीक्षण किया है। एक सप्ताह बाद फिर जांच करूंगी। यदि सफाई नहीं हुई तो एक्शन लेंगे। फॉगिंग आदि भी योजनाबद्ध तरीके से होगी।
सवाल: शहर में स्ट्रीट लाइटें तो खूब लगी हैं परंतु रात में अधिकतर बंद रहती हैं। कई बार तो दिन में लाइट ऑन और रात में ऑफ रहती हैं। बड़ी संख्या में लाइटें खराब हो गई हैं। इसके अतिरिक्त डेयरियों और डग्गामार बसों ने भी शहर को हलकान कर रखा है?- डा. वीर बहादुर सिंह, प्रिंसिपल केके इंटर कॉलेज
सुनीता: मैं इसकी जांच कराऊंगी। नई लगीं लाइटें कैसे बंद हो गईं। जिस कंपनी ने लाइटें लगाई हैं उससे इन्हें बदलवाएंगे या ठीक कराएंगे। डेयरियों को बाहर करने पर तो काम चल रहा है। वास्तव में डग्गामार बसों से जाम लगता है। देखेंगे कि नगर निगम इसमें क्या कर सकता है?
सवाल: दिल्ली रोड शहर की लाइफ लाइन है। इसके डिवाइडर पर इतने कट हैं कि पूरा दिन जाम लगता है। ऊपर से ऑटो और ई रिक्शा ने स्थिति खराब कर रखी है। ट्रैफिक पुलिस कहती है पत्र लिखने के बाद भी नगर निगम कट बंद नहीं कर रहा है?- डा. मोहम्मद रिजवान, एसोसिएट प्रोफेसर, मेरठ कॉलेज
सुनीता: मैं दिखवाती हूं कि ट्रैफिक पुलिस का क्या पत्र आया है। कट बंद कराने की हम पहल करेंगे। इस निधि से जितना पैसा निगम खर्च कर सकता है, किया जाएगा। पुलिस से समन्वय स्थापित कर जल्द ही इस पर काम होगा।
सवाल: कुछ सड़कें निगम की है तो कुछ एमडीए की। अतिक्रमण पर पुलिस को चालान करने का अधिकार नहीं है। यह निगम का अधिकार है। जनता परेशान है। कई ऐसी समस्याए हैं जिस पर शिकायत करो तो एक्शन नहीं होता?- राजीव गोयल, डेवलेपर
सुनीता: हम जल्द ही टोल फ्री नंबर जारी कर रहे हैं। जनता इस पर कॉल करके समस्या बता सकती है और कोशिश रहेगी कि 24 घंटे में इसका निस्तारण हो जाए। अतिक्रमण हटाने के लिए भी टीम का गठन कर रहे हैं।
सवाल: शहर में कई प्राथमिक विद्यालय हैं जिनकी हालत खराब है। मुस्लिम आबादी में सरकारी स्कूल कम हैं?- मतीन अंसारी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रधानाध्यापक
जवाब: निगम की परिधि के स्कूलों का मैं निरीक्षण करूंगी। हमारे स्तर से जो भी हो सकता है किया जाएगा। वास्तव में इन स्कूलों की हालत सुधारने की जरूरत है।
सवाल: हमने अक्सर शहर के पहले महापौरों को केवल फीता काटते देखा है। आपसे उम्मीद है कि आप काम करेंगी। खासतौर पर शहर के बाहरी क्षेत्र में रहने वालों का संपर्क नगर निगम कर्मचारियों और अधिकारियों से नहीं हो पाता है। वे अपनी बात कैसे पहुंचाएं?- ऋचा सिंह, समाजसेवी
सुनीता: मुझे नगर निगम की ओर से सीयूजी नंबर जारी हुआ है। उस पर किसी भी समय कॉल करके मुझसे बात की जा सकती है। कोशिश रहेगी कि जनता के साथ संवाद बना रहे।
सवाल: जो गांव नगर निगम में शामिल हो गए हैं, उनकी जमीनों का चिह्निकरण नहीं हुआ है। उन पर कब्जे हो रहे हैं। मलबा शुल्क एमडीए जनता से लेता है परंतु नियमानुसार उसे निगम को नहीं देता है?
सुनीता: हम अपना शुल्क एमडीए से लेंगे। ऐसी जमीनों का चिह्निकरण और उसका उपयोग करेंगे जो निगम की हैं। उन पर अवैध कब्जे नहीं होने दिए जाएंगे।
सवाल: नगर में निगम केचार अस्पताल हैं। चारों की हालत ठीक नहीं है। यदि उनकी हालत ठीक हो तो शहर की जनता को लाभ मिले। नगर निगम इनकी तरफ क्यों नहीं देखता?- डा. रजनीश भारद्वाज, होम्योपैथी चिकित्सक
जवाब: मैं खुद इन अस्पतालों का निरीक्षण करूंगी। निश्चित रूप से यहां व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। यहां दवा का पूरा इंतजाम किया जाएगा।
सवाल: सड़क बनती हैं और टूट जाती हैं। किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं। आखिर कोई तो इसका जिम्मेदार हो- डा. तनुज अरोड़ा, डेंटल सर्जन
जवाब: इसकी जिम्मेदारी फिक्स करेंगे। जो सड़क बनेंगी या गड्ढे भरे जाएंगे उसकी मॉनीटरिंग होगी। सड़क बनाने वाली एजेंसी या कांट्रेक्टर को ही इसका जिम्मेदार बनाया जाएगा।
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