क्षेत्रवासियों के मुताबिक, सुबह लगभग 7:00 बजे तेज धमाके के साथ यह बिल्डिंग धराशायी हो गई। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास की कई बिल्डिंगों में दरारें आ गईं। वहीं, निकट स्थित एक दूसरी बिल्डिंग की पहली मंजिल की छत भी गिर गई।
जिस मकान में फैक्टरी संचालित थी सत्यकाम स्कूल के पास ही है। विस्फोट स्कूल के समय से पहले हुआ अन्यथा बड़ा नुकसान हो सकता था। विस्फोट से तीन मकान गिरने के साथ दूरदराज के मकान भी हिल गए। सत्यकाम स्कूल के अलावा आसपास के कई मकानों के शीशे टूट गए।
विस्फोट के कारण इलाके में भगदड़ मच गई। कुछ हादसा समझकर बाहर निकले तो कुछ इसे भूकंप समझने लगे। मौक पर पहुंचने पर लोगों को जानकारी हुई। घटना की सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कराया और मलबा हटाकर नीचे दबे तकरीबन दस लोगों को मेडिकल भेजा।
मौक पर जांच करती पुलिस
- फोटो : Amar Ujala
वहीं हादसे की सूचना पर डीएम दीपक मीणा व सिटी मजिस्ट्रेट समेत सभी अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। वहीं मौके पर भारी संख्या में भीड़ मौजूद है। राहत-बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ को भी मौक पर बुलाया गया है। बताया गया कि पुलिस की टीम राहत-बचाव कार्य में लगी थी कि इस दौरान भी एक के बाद एक दो धमाके हुए जिसमें जेसीबी चालक घायल हो गया। टीम मौके पर बचाव कार्य में जुटी है।
डीएम दीपक मीणा का कहना है कि मृतकों की अभी पहचान नहीं हो सकी है। ये सभी फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर हो सकते हैं। पहचान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बताया गया कि रिहायशी इलाके में यह फैक्टरी पिछले आठ माह से चल रही थी।
मौक पर पहुंची एनडीआरएफ
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अभी तक हुई पुलिस की जांच के अनुसार पहले इस बिल्डिंग में फर्नीचर शोरूम था। एक वर्ष पहले भी इस फैक्टरी में भीषण आग लगी थी, जिसमें मेरठ निवासी इमरान के फर्नीचर शोरूम में भी जबरदस्त आग लगी थी। उस समय भी कई लाख का नुकसान हुआ था।
घनी आबादी वह सत्यकाम इंटर कॉलेज के पास में इतनी बड़ी केमिकल फैक्टरी बिना अनुमति के ही चल रही थी। फैक्टरी में विद्युत विभाग द्वारा कनेक्शन दिया गया था। इसकी कैसे अनुमति मिली? किसने अनुमति दी? कौन से विभाग की अनुमति थी? यह सब जांच का विषय है।
मकान में रह रहे परिवार का नहीं चल सका पता
फैक्टरी के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इस फैक्टरी में ऊपर के हिस्से में साबुन बनाया जा रहा था जबकि दूसरी मंजिल पर भारी मात्रा में पटाखे मिले हैं। वहीं नीचे के हिस्से में एक परिवार भी रह रहा था, लेकिन उस परिवार का कोई अता-पता नहीं है। न ही किसी व्यक्ति ने धमाके के दौरान उसे परिवार को फैक्टरी से निकलते हुए देखा। दूसरे धमाके के बाद रेस्क्यू कार्य तुरंत ही बंद हो गया। रेस्क्यू कार्य में लगे जेसीबी चालक के घायल होने के बाद कोई भी जेसीबी चालक यहां काम करने के लिए तैयार नहीं है। फायर ब्रिगेड की दर्जन पर गाड़ियां पानी डालकर धमाके की संभावना को समाप्त कर रही है।
पुलिस प्रशासन का मानना है कि धमाका कंप्रेशर फटने अथवा केमिकल रिएक्शन होने या फिर किसी गैस सिलेंडर फटने के कारण हुआ है। इसकी जांच कराई जा रही है। वहीं एटीएस भी मौके पर पहुंचकर जांच कर रही है।
ऊर्जा मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर
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हादसे की सूचना पर आईजी नचिकेता झा भी मौके पर पहुंचे हैं। ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने चल रही फैक्टरी की जांच कराने के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम डॉग स्क्वायड के साथ अब रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंची है।
मुख्यमंत्री घटना पर लिया संज्ञान, ये हुए घायल
हादसे में ने लोहिया नगर के ही रहने वाले करण, ओमकार, श्योराज, आसमा, सोनाक्षी और कार्तिक घायल हुए हैं। वहीं पूरे मामले लखनऊ तक गूंज हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर संज्ञान लेते हुए घटना की जांच कर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।
एटीएस की जांच में सामने आई ये बात
एटीएस की टीम की प्रथम दृष्टया जांच में मौके से विस्फोटक सामग्री मिलने की पुष्टि हुई है। एटीएस ने मौके से मिली सामग्री को बच्चों की बंदूक में लगने वाली मिसाइल माना है। बता दें कि हापुड़ के धौलाना में भी भीषण विस्फोट हुआ था, वहां पर भी ऐसी ही विस्फोटक सामग्री मिली थी।
लोहिया नगर स्थित अवैध फैक्टरी में धमाके से हुई मजदूरों की मौत के मामले में शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने एक्स (X) पर पोस्ट डाली है। उन्होंने पोस्ट डालते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग किया और लिखा कि यह आठ महीनों के भीतर दूसरी घटना है। अवैध फैक्टरी में धमाका होने से पांच मजदूरों की मौत हो गई, इससे पहले फरवरी में जनशक्ति कोल्ड स्टोर दौराला में सात मजदूरों की मौत हो गई थी। उन्होंने लिखा कि जिला प्रशासन व मेरठ पुलिस सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर आंखें मूंदे रखती है। साथ ही डीएम को भी टैग किया है।