उत्तर प्रदेश के बागपत में सिनौली में केंद्रीय संरक्षित स्मारक प्राचीन स्थल की करीब 300 बीघा जमीन अधिग्रहण को मंजूरी मिल गई है। 16 लाख प्रति बीघा मुआवजा तय किया गया है। खोदाई में निकले नर कंकाल, तलवार, रथ, धनुष समेत अन्य अवशेष दिल्ली की जगह अब सिनौली के संग्रहालय में रखे जाएंगे।
उत्तर प्रदेश के बागपत में सिनौली क्षेत्र में चार हजार साल पुराना इतिहास संजोने के लिए संग्रहालय बनाया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय संरक्षित स्मारक प्राचीन स्थल की करीब 300 बीघा जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी हो गई है। यहां संग्रहालय बनाकर खोदाई में निकले नर कंकाल, तलवार, रथ, धनुष समेत अन्य सभी अवशेष को रखा जाएगा।
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सिनौली में तीन चरणों में उत्खनन कराया गया था। वहां पहली बार खोदाई में हड़प्पा कालीन सभ्यता के संकेत मिले थे, उसके बाद करीब चार हजार साल पुराने पुरावशेष मिले। उन पुरावशेषों में शाही ताबूत, प्राचीन रथ, नर कंकाल, महिला के कंकाल के साथ शीशा व हड्डियों से बना कंघा, धनुष, तांबे की तलवार, मृदभांड सामने आ चुके हैं।
यहां से निकले पुरावशेषों को दिल्ली के संग्रहालय में रखवा दिया गया था और उस क्षेत्र को केंद्रीय संरक्षित स्मारक प्राचीन स्थल घोषित कर दिया गया था। यह आगरा सर्किल का 267वां संरक्षित स्मारक है।
16 लाख रुपये प्रति बीघा तय हुआ मुआवजा
सिनौली में जिस जमीन को अधिग्रहीत किया जाएगा, उसका मुआवजा सर्किल रेट के आधार पर करीब 16 लाख रुपये प्रति बीघा तय किया गया है। इसको लेकर जमीन के मालिकों के साथ प्रशासन व पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की बैठक भी हुई। जिसमें किसानों ने जमीन देने पर सहमति जताई है और इस कारण ही जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई जल्द होने की उम्मीद है।
सिनौली में केंद्रीय संरक्षित स्मारक प्राचीन स्थल की करीब 300 बीघा जमीन को अधिग्रहीत किया जाएगा। इसके लिए बैठक हो चुकी है और इस पर मुहर भी लग गई हैं। अब अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू करने के साथ ही मुआवजा वितरण किया जाना है। यहां संग्रहालय बनाने की तैयारी है, जिससे खोदाई में निकले पुरावशेषों को वहां रखकर संरक्षित किया जा सके। - अमित कुमार, एडीएम बागपत
जमीन अधिग्रहण के लिए अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। 16 लाख रुपये प्रति बीघा जमीन देने पर बात हुई है। जिससे यहां संग्रहालय बनाया जा सके। यहां आसपास अभी और खोदाई कार्य हो सके। - सुनीता, ग्राम प्रधान सिनौली