यश हत्याकांड में शावेज और अन्य आरोपियों ने खुलासा किया कि वे यश के हाथ-पैर बांधने और मुंह में कपड़ा ठूंसने के बाद उसे फैक्टरी में छोड़कर चले गए थे। इसके तीन घंटे बाद फैक्टरी में लौटे तो उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद शव बोरे में बंद कर एक ठेले पर नाले तक लेकर गए। साक्ष्य मिटाने की मंशा से ही उन्होंने स्कूटी के भी कई टुकड़े कर दिए थे। पुलिस का मानना है कि मरने से पहले यश काफी तड़पा होगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्राथमिक जांच में उसकी मौत दम घुटने से हुई है।
छह दिन पुराना शव होने के कारण विसरा भी सुरक्षित रखा गया है। आरोपियों के मुताबिक सोशल मीडिया के माध्यम से यश और शावेज की छह महीने पहले दोस्ती हुई थी। उसके बाद दोनों ही समलैंगिक ग्रुप से जुड़ गए थे। 26 जून को दोनों की ऐप के माध्यम से बात हुई।
इसके बाद यश लिसाड़ीगेट में शावेज की फैक्टरी में स्कूटी से पहुंचा। जहां पर शावेज के साथ कर्मचारी अलीशान और सलमान मौजूद थे। यहां पांच हजार रुपये के लेनदेन को लेकर यश और शावेज में बहस हुई। इसी दौरान शावेज ने यश का गला दबा दिया था। चीख-पुकार सुनकर अलीशान और सलमान भी पहुंचे।
फिर तीनों ने मिलकर यश के हाथ-पैर रस्से से बांध दिए। उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और फिर उसे फैक्टरी में छोड़कर तीनों चले गए। आरोपियों के मुताबिक करीब तीन घंटे बाद वह आए, तब तक यश की मौत हो चुकी थी। तीनों ने शव को एक बोरे में बंद किया और फिर ठेले में रखकर पिलोखड़ी पुलिस चौकी के पास नाले में फेंक गए।