आषाढ़ में तीन ग्रहण
आषाढ़ के महीने में तीन ग्रहण लगेंगे। जिसमें दो चंद्र उपच्छाया ग्रहण और एक सूर्य ग्रहण होगा। माह की शुरुआत भी चंद्र उपच्छाया ग्रहण से हुई। वहीं, इसका अंत भी चंद्र ग्रहण से होगा। अब 21 जून को सूर्य ग्रहण होगा। दूसरा चंद्र उपच्छाया ग्रहण पांच जुलाई को लगेगा। जबकि पहला चंद्र उपच्छाया ग्रहण पांच-छह जून की रात्रि को हो चुका है।
सूर्य ग्रहण के अशुभ प्रभाव
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि 21 जून को अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगेगा। ज्योतिष में इन ग्रहणों का लगना अच्छा नहीं माना जा रहा है। देश और धरती पर इनका अशुभ प्रभाव पड़ेगा।
- पूरे देश में मनाया जाएगा पर्व
आषाढ़ संक्रांति देश के सभी हिस्सों में किसी न किसी रूप में मनाई जाती है। शुभ दिन का आरंभ प्राय: स्नान और सूर्य उपासना से होता है। महामंडलेश्वर नीलिमानंद जी ने कहा कि ऐसी धारणा है कि ऐसा करने से स्वयं की शुद्धि होती है और पुण्य लाभ भी मिलता है। इस दिन गायत्री महामंत्र का श्रद्धा से उच्चारण किया जाना चाहिए और सूर्य मंत्र का जाप करना उत्तम होता है। इससे बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। संक्रांति का आरंभ सूर्य की परिक्रमा से किया जाता है। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन को संक्रांति कहते हैं। संक्रांति के दिन मिष्ठान बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। यह भोग प्रसाद परिजनों में बांटा जाता है।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार
पंडित चंडी प्रसाद ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ माह में गुरु की उपासना सबसे फलदायी होती है। इस महीने में श्री हरि विष्णु की उपासना से भी संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। इस महीने में जल देव की उपासना का भी महत्व है। ऊर्जा के स्तर को संयमित रखने के लिए आषाढ़ के महीने में सूर्य की उपासना की जाती है। कोरोना महामारी के बीच आषाढ़ स्वास्थ के नजरिए से ठीक नहीं होगा। दरअसल आषाढ़ संधि काल का महीना है। आषाढ़ से वर्षा ऋतु की शुरू होने से रोगों का संक्रमण सर्वाधिक होता है।
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