बिजली चोरी रोकने के लिए एबीसी केबल पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी पीवीवीएनएल में हर माह करीब 2100 करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो रही है। मुरादाबाद और सहारनपुर जोन में सर्वाधिक बिजली चोरी हो रही है। मेरठ जोन में भी बिजली चोरी का आंकड़ा 293 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि नोएडा जैसा औद्योगिक शहर भी बिजली चोरी में पीछे नहीं है। यहां हर महीने करीब 109 करोड़ रुपये की बिजली चोरी हो रही है।
केंद्र सरकार ने 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए उदय योजना और रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम में बिजली कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये की मदद की। वहीं, लाइन लॉस कम करके 15 फीसदी तक लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए शहर से गांव तक खुले तारों के स्थान पर एबीसी केबल डाले जा रहे हैं। दावा है कि एबीसी केबल से बिजली चोरी रोकने में मदद मिलती है। लेकिन, पीवीवीएनएल के आंकड़ों से ऐसा नहीं लग रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ने सभी जोन के उपभोक्ताओं के लिए 12236 मिलियन यानी 1223.60 करोड़ यूनिट बिजली खरीदी थी। इसमें कंपनी ने केवल 8743 मिलियन यूनिट यानी 874.30 करोड़ यूनिट बिजली बेची। 3493 मिलियन यूनिट यानी 349.30 करोड़ यूनिट बिजली चोरी हो गई। औसतन छह रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से 2095.80 करोड़ रुपये की बिजली चोरी हुई है।
बिजली चोरी में मुरादाबाद, सहारनपुर आगे
पीवीवीएनएल के मुरादाबाद और सहारनपुर जोन में सर्वाधिक बिजली चोरी हो रही है। मुरादाबाद जोन में खरीदी गई 3054 मिलियन यूनिट में से 1073 मिलियन यूनिट चोरी हो गई। यह 643.80 करोड़ रुपये है। वहीं सहारनपुर जोन में खरीदी गई 2570 मिलियन यूनिट में से 873 मिलियन यूनिट बिजली चोरी हो गई, जो 523.80 करोड़ रुपये की है। वहीं, मेरठ जोन में भी खूब बिजली चोरी हो रही है। खरीदी गई 1857 मिलियन यूनिट में से 488 मिलियन यूनिट बिजली चोरी हो गई। यह करीब 292.80 करोड़ रुपये की है।
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