सिस्टम में दर्ज होगा सभी ब्योरा
अधिशासी अभियंता आईटी रवि कुमार ने बताया कि आरटीडास के जरिए न केवल कंट्रोल रूम में बैठे ही फीडर पर चल रहे वोल्टेज और लोड आदि का पता चलता रहेगा बल्कि होने वाली ट्रिपिंग, ट्रिपिंग के समय और ट्रिपिंग के कारण, लो या हाई वोल्टेज, बड़ा या छोटा फाल्ट, काम के लिए लिया गया शटडाउन आदि का पता चलता रहेगा। कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी संबंधित बिजलीघर स्टाफ से फोन पर जानकारी लेने के साथ दिशा निर्देश भी दे सकेंगे।
सभी बिजलीघरों पर रहेगी एमडी की नजर
कंट्रोल रूम में नोडल अधिकारी की नियुक्ति के साथ ही जोनवार स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। इन सभी की मॉनिटरिंग के साथ ही कंपनी एमडी भी समय-समय पर बिजलीघरों की आपूर्ति चेक कर सकेंगे। फाल्ट के कारण जान कर उससे संबंधित सामग्री आदि भी स्टोर से भेजी जाएगी ताकि तेजी से फाल्ट अटेंड कर आपूर्ति सुचारू की जा सके।
उपभोक्ताओं को मिलेगी निर्बाध आपूर्ति
आरटीडास के जरिए कंपनी के अंतर्गत आने वाले 14 जिलों के शहरी बिजलीघरों को एफआरटीयू के जरिए ऑनलाइन किया जा रहा है। आरटीडास के जरिए कोई भी अधिकारी या कर्मचारी निजी हितों के लिए उपभोक्ताओं की बिजली प्रभावित नहीं कर सकेंगे। सिस्टम के शिकंजा कसने से उपभोक्ताओं तक शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली पहुंचाई जा सकेगी। - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी, पीवीवीएनएल