ब्लैक फंगस का खतरा बरकरार है। मेरठ में अब तक 14 मरीजों के ऑपरेशन हुए हैं और 11 मामलों में दोनों आंखों की रोशनी बचा ली गई है। तीन लोगों को एक-एक आंख की रोशनी गंवानी पड़ी है। सभी ऑपरेशन डॉ. पुनीत भार्गव ने आनंद अस्पताल में किए हैं। जिन लोगों की आंखों की रोशनी गई है, ब्लैक फंगस ने उन्हें पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। अगर इनकी दूसरी आंख का ऑपरेशन समय पर न होता तो पूरी रोशना जा सकती थी। जिन मरीजों का ऑपरेशन हुआ, वे मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और हापुड़ आदि जिलों के हैं।
अभी तक यह साबित हुआ है कि ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जो अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की दवाएं ले रहे हैं। विशेष रूप से स्टेरॉयड युक्त दवाएं लेने वालों को इस बीमारी की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे व्यक्तियों के साइनस या फेफड़े, हवा से फंगस वायरस के अंदर जाने के बाद प्रभावित होते हैं। अनियंत्रित मधुमेह से प्रभावित और कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों के अलावा लंबे समय तक आइसीयू में भर्ती रहे मरीजों और अंग प्रत्यारोपण आदि के रोगी इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं।
बीमारी के लक्षण इस तरह समझें
इस बीमारी के संकेत और लक्षणों में आंख व नाक के आसपास दर्द और लाली रहना, बुखार, सिर दर्द, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, खूनी उल्टी व मानसिक स्थिति में बदलाव आना शामिल है। अगर नाक में रुकावट या जमाव, नाक से काला और खूनी स्राव, गाल की हड्डी पर दर्द, चेहरे के एक तरफ दर्द, सुन्न और सूजन होना, नाक व तालू पर कालापन आना, दांतों में दर्द उनका ढीला होना और जबड़े में दिक्कत होने पर अलर्ट हो जाना चाहिए। छाती में दर्द और सांस लेने में परेशानी भी इस बीमारी के लक्षण हैं।
मास्क और ग्लव्स जरूर पहनें
मेडिकल के कोविड ब्लाक के प्रभारी डॉ. धीरज राज ने बताया कि बचाव के लिए मास्क का उपयोग अवश्य करें। अगर धूल भरे निर्माण स्थल पर जा रहें हैं, तो मास्क जरूर पहनें। मिट्टी, बागवानी, काई या खाद आदि से जुड़े काम करते समय जूते, लंबी पैंट, पूरी बाजू वाली कमीज और दस्ताने पहनना जरूरी है।
घबराएं नहीं... एक-दूसरे से नहीं फैलता
ब्लैक फंगस खतरनाक है लेकिन राहत की बात यह है कि कोरोना की तरह यह एक-दूसरे से नहीं फैलता। डॉक्टरों के मुताबिक, जो लोग कोरोना का इलाज करा रहे हैं, उन्हें एहतियात की जरूरत है। सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि ब्लैक फंगस से बचाव के लिए कोविड-19 नेशनल टास्क फोर्स और एक्सपर्ट ग्रुप ने दिशा-निर्देश जारी किया है। इसमें गंभीर रोग से प्रभावित लोगों को इससे बचने की विशेष सलाह दी गई है।