भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। पार्टी ने इस पद के लिए गौरव चौधरी को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पार्टी के जिलाध्यक्ष अनुज राठी ने गौरव का नाम तय होने की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें पूरी ताकत से चुनाव लड़ाया जाएगा।
चुनाव के दौरान जब जिला पंचायत सदस्य पद के भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किए थे, तभी से अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में गौरव का नाम चर्चा में था। परिणाम में गौरव समेत भाजपा के पांच प्रत्याशी ही जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद करीब-करीब तय माना जा रहा था कि गौरव ही अध्यक्ष पद के दावेदार होंगे। भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह और सिवालखास विधायक जितेंद्र सतवाई गौरव की मजबूत पैरवी कर रहे थे।
मूलरूप से गांव कुसैड़ी निवासी गौरव के पिता मत्स्य पालन विभाग में सेवारत हैं। राजनीति से उनके परिवार का पुराना नाता रहा है। गौरव के चाचा योगेंद्र कुसैड़ी सक्रिय राजनीति में हैं। उनकी चाची सुनीता कुसैड़ी गांव की प्रधान रहने के साथ ही 2010 में जिला पंचायत सदस्य भी रही हैं।
जर्मनी में उच्च शिक्षा, वहीं शुरू किया कारोबार
गौरव पहली बार पंचायत की राजनीति से सक्रिय राजनीति में आए हैं। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा गौरव ने मेरठ से ही पूरी की। बाद में वह उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी चले गए। वहीं पर उन्होंने होटल के साथ रियल एस्टेट और आयात-निर्यात का कारोबार शुरू कर दिया। कारोबार पूरी तरह स्थापित होने पर गौरव भारत लौटे और पंचायत की राजनीति में सक्रिय हो गए।
अब गुर्जरों और दलितों को साधने की तैयारी
जिला पंचायत के 33 सदस्यों में सात गुर्जर, छह जाट और पांच मुस्लिम हैं। वहीं त्यागी, ब्राह्मण और ठाकुर दो-दो वोट के साथ आठ दलित हैं। चुनाव में दलित और मुस्लिमों के वोट सबसे ज्यादा अहम होंगे। लेकिन गुर्जर वोटों को भी कम करके नहीं आंका जा सकता है। ऐसे में अब विपक्ष गुर्जर प्रत्याशी और गुर्जर, मुस्लिम और दलितों के सहारे ही सत्ता पक्ष के प्रत्याशी को टक्कर दे सकता है। भाजपा जाट, ब्राह्मण, त्यागी, ठाकुर मतदाताओं को जहां अपना मानकर चल रही है वहीं उसे गुर्जर और दलित मतदाताओं में सेंधमारी में सफलता की उम्मीद है।