महंगे डीजल की मार झेल रहे किसानों की जेब को महंगी एनपीके खाद ने भी अब ढीला करना शुरू कर दिया है। एनपीके खाद पर प्रति टन हुई 5300 रुपये की बढ़ोतरी से मेरठ और सहारनपुर मंडल के किसानों पर करीब 20 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ गया है।
किसानों का कहना है कि महंगे डीजल और खाद के चलते फसल लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन लागत के अनुपात में फसल के दाम नहीं मिल पा रहे हैं। लावड़ निवासी किसान महकार सैनी का कहना है कि वे हर साल करीब 12 हेक्टेयर आलू की बुआई करते हैं, जिसमें एनपीके खाद की करीब 50 बोरी लगती है। सरकार ने एनपीके खाद पर प्रति बोरी 265 रुपये की बढ़ोतरी की है। इससे उन पर 13250 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।
गांव मसूरी निवासी कुलदीप काकरान ने बताया कि वे हर साल करीब 10 हेक्टेयर आलू की बुआई करते हैं। इसमें करीब 40 बोरी एनपीके खाद लगती है। 265 रुपये प्रति बोरी दाम बढ़ोतरी होने से 10600 रुपये अधिक खर्च होंगे। इस तरह के ये केवल दो ही मामले नहीं है, बल्कि मेरठ और सहारनपुर मंडल के उन किसानों की जेब पर करीब 20 करोड़ रुपये का बोझ पड़ गया है जो एनपीके खाद का प्रयोग करते हैं।
37 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा खपत
मेरठ और सहारनपुर मंडल में हर साल 37 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा एनपीके की खपत होती है। पिछले साल के एनपीके खाद खपत के आंकड़ों पर नजर डाले तो मेरठ और सहारनपुर मंडल में 37229 मीट्रिक टन एनपीके की खपत हुई थी। इसमें मेरठ मंडल में 20483 मीट्रिक टन और सहारनपुर मंडल में 16746 मीट्रिक टन की खपत हुई थी। महंगी एनपीके के चलते अब मेरठ मंडल के किसानों पर जहां 10.85 करोड़ का बोझ बढ़ा है तो वहीं सहारनपुर मंडल के किसानों पर 8.87 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ गया है।
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