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व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में नहीं दिया जा रहा दाखिला

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व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में नहीं दिया जा रहा दाखिला
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बिजनौर। शासन का युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण पर जोर है। जिले में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के 50 से अधिक विद्यालयों में कक्षा 11 व 12 के छात्र-छात्राओं को व्यवसायिक पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन विद्यालय छात्रों को इनमें दाखिला नहीं दे रहे हैं। मामला शासन तक तक पहुंचा है और शिक्षा निदेशक ने इस पर नाराजगी जताई है। इसके बाद डीआईओएस ने विद्यालयों को व्यवसायिक पाठ्यक्रम में दाखिले देने की हिदायत दी है।
जिले में 32 राजकीय व 73 अशासकीय सहायता प्राप्त इंटर कालेज हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के अनुसार सभी पाठ्यक्रम करीब 25 वर्ष से चल रहे हैं। व्यवसायिक पाठ्यक्रम में करीब दो दर्जन विभिन्न प्रकार की ट्रेड संचालित हैं। इंटर पास करने के बाद छात्र हायर व्यवसायिक कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इसके लिए शासन से शासन से उपकरण व वर्क शेड उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन विद्यालय छात्रों को व्यवसायिक पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं दे रहे हैं। छात्रों को पाठ्यक्रम में शिक्षकों की कमी या शिक्षक नहीं होने की बात कहकर टरका दिया जाता है। परेशान छात्र-छात्राएं डीआईओएस वह प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। छात्रों को व्यवसायिक पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं देने का मामला शासन तक पहुंच गया है।
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व्यवसायिक शिक्षा में ये कोर्स है स्वीकृत
शासन से विद्यालयों में नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग, कुकिंग, कटिंग एवं टेलरिंग, फल एवं खाद्य संरक्षण, परिधान एवं साथ सज्जा, आटोमोबाइल, कंप्यूटर, फोटोग्राफी, शार्ट हैंड, आदि दो दर्जन व्यवसायिक कोर्स संचालित हैं। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि शासन से व्यवसायिक पाठ्यक्रम के संचालन के उपकरण व वर्क शेड उपलब्ध कराया गया है। यदि इन विद्यालयों से आने वाले शिक्षकों की बात पर यकीन करें तो शासन से कोर्स शुरू करने के लिए लाखों के उपकरण व फर्नीचर आदि उपलब्ध कराया गया था।
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सौ से अधिक हैं व्यवसायिक कोर्सों के शिक्षकों की संख्या
बताया जाता है कि व्यवसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम में बड़ा खेल चल रहा है। सौ से अधिक शिक्षक इन पाठ्यक्रमों के हैं और उन्हें करीब 15 हजार रुपये मानदेय मिलता है। माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट लंबे समय से व्यवसायिक शिक्षकों को नियमित शिक्षक घोषित करने की मांग कर रहा है। लेकिन प्रवेश की बात करें तो एक दो कोर्स में कुछ एडमिशन है। प्रवेश के बजाए इन कोर्सों को बंद कराने पर विद्यालयों का जोर है।
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