मेरठ में चौधरी चरण सिंह जिला कारागार से बंदियों को दो माह के लिए छोड़ने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई। न्यायालय से अनुमति के बाद जेल प्रशासन की ओर से पहले दिन 51 बंदियों को दो माह की अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया। सजायाफ्ता कैदियों पर अगले सप्ताह तक निर्णय आने की संभावना जताई गई है। सात साल तक की सजा के दायरे में आने वाले बंदी इसमें शामिल किए गए। शुक्रवार सुबह सभी बंदियों की परिजनों से बात कराने के बाद छोड़ दिया गया।
कोरोना काल में जेल में बंदियों की भीड़ को देखते हुए जनपद के 250 विचाराधीन बंदी और 70 सजायाफ्ता कैदियों को दो महीने की अंतरिम जमानत और पैरोल पर छोड़ा जाना है। दो दिन पहले जेल प्रशासन ने 250 बंदियों के प्रार्थना पत्र संबंधित न्यायालय को उपलब्ध कराए। इसके बाद शुक्रवार को 51 बंदियों की पहली टोली को अनुमति मिलने के बाद छोड़ा गया। इनमें दो महिला बंदी भी शामिल रहीं।
जेल में दर्ज पते पर ही रहना होगा
सभी बंदियों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद छोड़ा गया है। यह सभी जेल में दर्ज पते पर ही रहेंगे। एक शहर से दूसरे शहर में आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सभी को स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि उन्हें वर्तमान केस के आधार पर छोड़ा गया है। जमानत पर छूटने के बाद अगर वह फिर कोई अपराध करते हैं तो पुलिस को तत्काल उन्हें जेल भेजने का अधिकार है।
सजायाफ्ता पर शासन लेगा निर्णय
जिला जेल से 70 सजायाफ्ता कैदियों की भी लिस्ट तैयार कर शासन को भेजी गई है। इन्हें भी पैरोल पर रिहा किया जाना है। जेल प्रशासन के अनुसार सभी के प्रार्थना पत्र शासन को भेजे जा चुके हैं। अगले सप्ताह तक इन प्रार्थना पत्रों पर निर्णय लिया जा सकता है। शासन से अनुमति मिलने के बाद सभी को दो महीने की पैरोल पर छोड़ा जाएगा। उम्रदराज कैदियों को इसमें प्राथमिकता दी गई है।
पहली लिस्ट में 51 विचाराधीन बंदियों को छोड़ा गया है। इनमें 49 पुरुष व दो महिला बंदी शामिल हैं। जैसे-जैसे अनुमति मिलती जाएगा, उन्हें छोड़ा जाएगा। सजायाफ्ता पर शासन की अनुमति का इंतजार है।
- डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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