गांव रामराज में हुई गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञ ने बताए बीमारी से रोकथाम के उपाय
अमर उजाला ब्यूरो
बहसूमा।
क्षेत्र के गांव रामराज में किसान आजाद बंसल के आवास पर बृहस्पतिवार को किसान गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञ मुकेश सिंह ने धान की फसल में कीट से बचाव की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समय धान की फसल में बाली निकल रही है। इस समय कीट एवं रोगों का प्रकोप दिखाई दे रहा है।
उन्होंने बताया कि धान की फसल में रस चूसक कीट बालियों का रस चूसकर फसल को काफी नुकसान पहुंचता है। इसकी रोकथाम के लिए एमिडाक्लोरपिड 17.8 एफएल की 100 एमएल की दवा या थायोमैथोक्सजाम 100 ग्राम एमिडा 100 एमएल या मोनोक्रोटोफास 36 ईसी दवा की 400 एमएल दवा को 125 लीटर पानी मे मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें। इसके अलावा धान की फसल मेें मुख्यत: हल्दीगांठ, गर्दनतोड, शीत झुलसा, जीवाणु झुलसा आदि बीमारियों का प्रकोप देखा जाता है। हल्दी गांठ की समस्या निम्र प्रजाति 2511, पीआर 14, 6444 आदि में देखी जाती है। यह बीमारी फसलो के 50 प्रतिशत पकने पर फसल को नुकसान पहुंचाती है। इस बीमारी से बचने के लिए प्रोपीकोनाजोल 250 एमएल दवा का 125 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें।
टूट जाती है बाली
गर्दनतोड (नेकटलास्ट) रोग धान प्रजाति पूसा-1 (मुच्छड़) व 1121 में दिखाई देता है। यह फसलों को काफी नुकसान पहुंचाता है। इस रोग की पहचान के लिए बालियों के निचले भाग पर कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। वही से ये बाली टूटकर गिर जाती है। इसकी रोकथाम के लिए आईसोप्रोठोलीन 400 एमएल दवा का 125 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। इस मौके पर भाजपा नेता आजाद बसंल, पूर्व प्रधान सतपाल गुर्जर, विकास शर्मा, मनीष राणा, राजेंद्र सिंह, इद्रजीत सिंह, तरसेम सिंह, प्रदीप रठोडा, डा. श्रीपाल कोहली, सरदार गुरप्रित सिंह, सरदार गुरूवचन सिंह, सरदार हरविंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।