मऊ। फूलन सेना की गुलामी छोड़ो स्वाभिमान रथ यात्रा का समापन मऊ पहुंचने पर हो गया। यह रथयात्रा पूर्वांचल के 12 जनपदों का भ्रमण कर यहां पहुंची। यहां पर समापन समारोह परिवर्तन सम्मेलन के रूप में परिवर्तित हो गया। सपा समर्थित फूलन सेना के इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि एवं नेता प्रति पक्ष सपा नेता रामगोविंद चौधरी ने कहा कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी की पीड़ा को समझा और उन्हें धर्मपुत्री बनाया।
कहा कि 2022 में सपा की सरकार बनने पर जातीय जनगणना कराकर जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी के सिद्धांत पर समानता ,समता और भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा पिछडों के वोट से सरकार बनाकर उनके हित के विरुद्ध काम करने लगी। कहा कि भाजपा शासन में पिछड़ों के हितों पर कुठाराघात किया गया। नौकरी मांग रहे नौजवानों पर, खाद मांग रहे किसानों पर सरकार ने लाठियां बरसाईं। कहा कि फूलन देवी सपा की धर्म की बेटी थी। मुलायम सिंह यादव उनके धर्मपिता थे। सपा ने फूलन देवी के ऊपर दर्ज तमाम मुकदमें वापस कर उन्हे देश के सबसे बड़े सदन का सदस्य बनाया था। कहा कि फूलन देवी हमारे बीच में नही है। उनके अधूरे अरमानों को पूरा करने के लिए फूलन सेना ने संकल्प के साथ यात्रा निकाला है।
विशिष्ट अतिथि एमएलसी समाजवादी पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप ने कहा कि सपा की सरकार बनी तो 300 यूनिट तक के बिजली के बिल माफ होगें। प्रत्येक जनपद में फूलन देवी की मूर्ति लगाने का काम होगा। उन्होंने कहा कि मोदी ने कहा कि हवाई जहाज में हवाई चप्पल वाले सैर करेंगे लेकिन उन्होंने हवाई अड़्डों को बेचकर हवाई चप्पल वालों को करारा तमाचा मारा है। देश नही बिकने देगें का नारा लगाने वालों को अब जनता को जबाव देने का वक्त आ गया है।
विशिष्ट तिथि एमएलसी व विधान परिषद के सचेतक रामसुन्दर दास निषाद ने कहा कि जिस समाज को मिटाना हो तो उसके इतिहास को मिटा दो, वह समाज खुद मिट जाएगा। भाजपा इसी तर्ज पर काम कर रही है।वहीं गोपाल निषाद ने फूलन सेना बनाकर फूलन देवी व निषाद समाज का इतिहास दोहराने का कार्य किया है। अध्यक्षता फूलन सेना के राष्ट्रीय महासचिव रामलाल राजभर व संचालन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुखदेव साहनी ने किया।
कार्यक्रम में सपा के निवर्तमान अध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव, राजेंद्र मिश्र , पूर्व विधायक उमेश चंद पांडेय, बैजनाथ पासवान, पूर्व ब्लाक प्रमुख सुजीत सिंह, ब्लाक प्रमुख राम कृष्ण यादव, क्रांति निषाद, प्रेमशंकर वर्मा , आफताब आलम, अजय बनवासी, शंकर निषाद, बृजभान तुरहा, दिनेश तुरहा, ऋषि देव साहनी, हाजीइर फान अंसारी, रामचंद्र राम आदि उपस्थित रहे।