मऊ। जिला प्रशासन की तरफ से किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए जहां तैयारी अंतिम दौर में चल रही है। वहीं पैक्स सचिवों के एक नवंबर से तथा पीसीएफ कर्मचारियों के आठ नवंबर से आंदोलन पर जाने की चेतावनी के कारण धान खरीद ठप होने का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन अभी तक जिला प्रशासन की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। प्रशासनिक तैयारी का यही हाल रहा तो किसानों को औने पौने में मेहनत कमाई की फसल बेचना पड़ सकता है।
जिले में 90 हजार हेक्टेयर में धान के फसल की बुुआई की गई है। अगेती धान के फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। किसान धान को सुखाने में जुट गए हैं। शासन की तरफ से किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए एक नवंबर से धान खरीद की तैयारी अंतिम दौर में चल रही है। इसके लिए जिले में पीसीएफ के 25 क्रय केंद्र, विपणन शाखा के 11 क्रय केंद्र तथा एफसीआई के दो सहित 38 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। धान खरीद का लक्ष्य 41200 एमटी लक्ष्य तय किया गया है।
इसी बीच पैक्स सचिवों के एक नवंबर से तथा पीसीएफ कर्मचारियों के आठ नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल के अल्टीमेटम के चलते धान खरीद पर ग्रहण लगने की संभावना प्रबल हो गई है। पीसीएफ कर्मचारियों तथा पैक्स सचिवों के आंदोलित होने के चलते तैयारी कुछ नहीं है। क्रय केंद्रों पर बैनर पोस्टर तक नहीं पहुुंच सके हैं। किसानों को क्रय केंद्रों की जानकारी तक नहीं हो सकी है।
इस संबंध में बीबीपुर के सत्यप्रकाश सिंह का कहना था कि एक नवंबर से धान खरीद होनी है, लेकिन अभी तक पोस्टर बैनर न लगने के चलते क्रय केंद्रों का पता नहीं चल पा रहा है। कंधरापुर के सुरेंद्र यादव का कहना था कि पीसीएफ कर्मचारियों तथा पैक्स सचिवों के आंदोलन के चलते जिले में धान खरीद को लेकर उहापोह की स्थिति है।
जिला प्रशासन की तरफ से क्रय केंद्र तो बना दिया गया है, लेकिन तैयारी दिख ही नहीं रहीहै। किसानों को फसल उचित मूल्य मिलना मुश्किल ही लग रहा है। सचिवों की प्रस्तातिव हड़ताल के दौरान धान खरीद की वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने के बाबत पूछे जाने पर डिप्टी आरएमओ विपुल सिनहा ने कहा कि वे अभी आजमगढ़ में बैठक में आए हैं। इस समय कुछ बता नहीं सकते। इतना कहकर उन्होंने फोट काट दिया।