मऊ। नगर सहित जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में बुधवार को जीवित्पुत्रिका व्रत श्रद्धापूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने पूरा दिन निर्जला व्रत रखा और देर शाम सोशल डिस्टेंसिंग से घरों, नदी, तालाब पर एकत्र होकर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। दीप और वस्त्र दान किया। साथ ही बाजारों में विभिन्न सामानों की खरीदारी की।
पर्व के मनाने के पीछे अभिज्ञान शाकुंतलम में ‘पुत्र पिंड परिपालनो’ नाम उपवास का उल्लेख है। इसमें यह दर्शाया गया है कि जीवित्पुत्रिका का व्रत देवी गौरी का व्रत है। इसमें शिवा की पूजन का विधान है। देहाती और लोक ख्याति में शिवा को सियामाई कहा जाता है। इस व्रत में जीमूतवाहन की पूजा का भी प्रावधान है। जीमूतवाहन ने नाग वंश की रक्षा की थी। इस घटना के बाद से ही हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत या जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाने लगा। इस दिन गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के करने से पुत्र दीर्घायु, सुखी और निरोग रहते हैं।
इसी मान्यता के तहत नगर के मठिया टोला, हरिकेशपुरा, सहादतपुरा, निजामुद्दीनपुरा, ब्रह्मस्थान, चांदमारी इमिलिया, पावर हाउस कालोनी, भीटी सहित विभिन्न मुहल्लों की महिलाएं घरों, मड़इया घाट, तमसा नदी तट सहित विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर सोशल डिस्टेंसिंग से एकत्र होकर गौरी गणेश की पूजा की। उधर, बाजारों में चढ़ावे के लिए फलों की खरीदारी में की। महिलाओं ने फलों और मिठाइयों की खरीदारी कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। निराजल व्रती महिलाओं ने अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना किया। साथ ही धार्मिक लोक कथाएं सुनकर धर्म की महत्ता को स्थापित करने का प्रयास किया।
कुसुम्हा संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के पतनई, बीबीपुर, गौरीडीह, कोरौली, बेलौली, उसरा, गोठा,शाहपुर, फरसरा खुर्द, कोरौली, विशुनपुरा, ठाकुरगांव, सरया, बीबीपुर, बुढावर, गोधनी,गौरीडीह, पतनई सहित विभिन्न इलाकों में व्रती महिलाओं ने मंदिरों, तालाबों और नदियों पर जाकर पूजन अर्चन किया। जीवित्पुत्रिका की कथा सुनकर पुत्रों की मंगल कामना की। दोहरीघाट संवाददाता के अनुसार कसबे के रामघाट, हनुमानगढ़ी, रामजानकी घाट, गोंठा रामशाला, मंडी प्रांगण, सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने जीवित्पुत्रिका व्रत रखकर शाम को पूजन किया।